सहारा पीड़ितों को मिलेगा न्याय, झारखंड सरकार देगी अनलिमिटेड कानूनी सहायता,विश्व भारती जनसेवा संस्थान की पहल पर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी
रांची।
01.02.2026
सहारा इंडिया में निवेश कर ठगे गए लाखों पीड़ित निवेशकों को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। विश्व भारती जनसेवा संस्थान द्वारा लंबे समय से लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई को अब झारखंड सरकार का पूर्ण सहयोग मिल गया है। झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सहारा पीड़ितों के हित में प्रभावी कानूनी पैरवी के लिए अनलिमिटेड फंड स्वीकृत कर दिया है।
संस्थान के राष्ट्रीय सचिव नागेंद्र कुमार कुशवाहा द्वारा दायर याचिका संख्या 147/2024 को झारखंड सरकार ने स्वीकार करते हुए 7 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के माध्यम से पेश किया। इसके साथ ही सरकार ने सहारा पीड़ितों की पहचान और भुगतान प्रक्रिया के लिए एक जांच आयोग गठित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
सरकारी घोषणा के अनुसार, झारखंड राज्य के वे नागरिक जो सहारा इंडिया में निवेश कर आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं,चाहे वे बेरोजगार हों, बीमारी से पीड़ित हों या असहाय स्थिति में हों—उन सभी को प्राथमिकता के आधार पर न्याय और आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी।
इस बीच सहारा इंडिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी तेज कर दी गई है। वर्ष 2024 में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा सहारा इंडिया के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब तक दो वारंटी संजीव कुमार और सुन्दर राय को गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। कुछ आरोपियों पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर इंटरपोल की मदद भी ली जा रही है।
विश्व भारती जनसेवा संस्थान ने इस महत्वपूर्ण सहयोग के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन का आभार व्यक्त किया है। साथ ही संस्था ने निरसा विधायक श्री अरूप चटर्जी का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने लगातार झारखंड विधानसभा में सहारा पीड़ितों का मुद्दा उठाया।
इस अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विश्व भारती जनसेवा संस्थान के
राष्ट्रीय अध्यक्ष जनार्दन मिश्रा,
राष्ट्रीय सचिव नागेंद्र कुमार कुशवाहा,
संयुक्त सचिव अशोक कुमार,
संयुक्त कोषाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार,
कृष्णा सिंह, अरुण ठाकुर, सुमित कुमार दत्ता, विपेश कुमार सिंह, आर.एन.पी चेतन, मनोज महतो, इंदु देवी सहित अनेक महिला-पुरुष पदाधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नौशाद अली-सहारा मामलों के जानकार