
श्रवण नाथ नगर स्थित श्री अमर धाम में विशाल संत भंडारे का का भव्य आयोजन किया गया,
हरिद्वार मे परम पूज्य गुरुदेव माधव दास महाराज ज्ञान का एक विशाल सूर्य थे महंत शत्रुघ्न दास महाराजहरिद्वार श्रवण नाथ नगर स्थित श्री अमर धाम में परम पूज्य गुरुदेव साकेतवासी श्री माधव दास जी महाराजकी पावन पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और अटूट समर्पण का एक ऐसा अलौकिक दृश्य देखने को मिला जिसने हर श्रद्धालु के हृदय को आनंद विभोर कर दिया। इस पुनीत घड़ी में गुरुदेव साकेतवासी श्री महंत माधव दास जीकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए एक विशाल संत भंडारे का भव्य आयोजन किया गया, जो मात्र एक परंपरा नहीं बल्कि गुरु और शिष्य के पवित्र संबंधों की गहराई का प्रतीक था। माता रानी वैष्णो देवी की असीम अनुकंपा से आयोजित इस पवित्र अनुष्ठान का मुख्य संकल्प समस्त भक्तजनों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करना था। श्री महंत शत्रुघ्न दास जी महाराज के पावन एवं दिव्य सानिध्य में माता रानी की पावन प्रतिमा का पूजन हुआ, आध्यात्मिक उर्जा संग्रहित करने हेतु भजन सत्संग का आयोजन किया गया जिससे संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक चेतना और गुरु-भक्ति के दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा।इस भावपूर्ण और गरिमामयी अवसर पर उपस्थित जनसमूह और संत समाज को संबोधित करते हुए श्री महंत शत्रुघ्न दास जी महाराज ने अत्यंत गंभीर और भावुक वाणी में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन दर्शन की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भगवान राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि वह जीवन पद्धति हैं जिसने संपूर्ण विश्व को मर्यादा के एक अटूट सूत्र में पिरोकर मानवता का पथ प्रशस्त किया है। महाराज जी ने बड़े ही मार्मिक ढंग से बताया कि प्रभु राम की शरण में आने वाला कोई भी जीव कभी रिक्त नहीं रहता, क्योंकि वे मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में हर मनुष्य को उसके मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। तथा संसार पर माता रानी वैष्णो देवी की अपार कृपा भी इसी प्रकार भक्तों के जीवन को कल्याण की और ले जाते हुए सार्थकता प्रदान करती है तथा माता रानी की कृपा से भक्तों का मानव जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता है परम पूज्य गुरुदेव इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान का एक विशाल सूर्य थेश्री महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा भगवान राम का संपूर्ण चरित्र ही हमारी सनातन संस्कृति की वह अनूठी और गौरवशाली झलक है, जो संसार को प्रेम, करुणा और धैर्य की शिक्षा देती है।
आयोजन के दौरान सेवा का भाव इतना प्रगाढ़ था कि वहां उपस्थित हर भक्त गुरुदेव की स्मृतियों में डूबा नजर आया। विशाल संत भंडारे में उमड़े जनसैलाब और संतों की सेवा में जुटे भक्तों के समर्पण को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात गुरुदेव अपनी सूक्ष्म उपस्थिति से सबको आशीष प्रदान कर रहे हों। महाराज जी ने बल देकर कहा कि गुरु का आशीर्वाद ही वह नौका है जो भवसागर से पार लगाती है इस अवसर पर बोलते हुए बाबा हठ योगी महाराज ने कहा पुण्यतिथि हमें आत्मचिंतन एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। गुरुजनों की पावन स्मृतियां हमारे हृदय पटल पर और मन मस्तिष्क पर उनकी छत्रछाया एवं कृपा के का स्पर्श करती है इस पावन अवसर पर प्रसाद ग्रहण करने के साथ-साथ भक्तों ने यह संकल्प भी लिया कि वे गुरुदेव द्वारा दिखाए गए सेवा और सत्य के मार्ग का आजीवन अनुसरण करेंगे। भक्ति और वैराग्य के इस अनूठे संगम ने श्री अमर धाम के कण-कण को ऊर्जावान बना दिया, जिससे धर्मनगरी हरिद्वार की यह पवित्र धरा और भी अधिक वंदनीय हो गई। इस अवसर पर बाबा हठयोगी महाराज महंत दुर्गादास महाराज महंत प्रहलाद दास महाराज महंत हितेश दास महाराज महंत सुतीक्ष्ण मुनी महाराज महंत रघुवीर दास महाराज साध्वी महंत राघव दास महाराज महंत बिहारी शरण महाराज महंत प्रेमदास महाराज महंत हरिदास महाराज मधुसाध्वी माता विमला देवी पंडित श्री राकेश उपाध्याय स्वामी हरिदास महाराज महंत रवि देव महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल देहरादून बाबा रमेशानन्द महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तजन उपस्थित थे