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शिक्षा संवाद को नई दिशा दे रहा “टीचर्स ऑफ बिहार” ● संगठन नहीं, विचार बना शिक्षक सशक्तिकरण का मंच

शिक्षा संवाद को नई दिशा दे रहा “टीचर्स ऑफ बिहार”

● संगठन नहीं, विचार बना शिक्षक सशक्तिकरण का मंच

पटना। राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बीते कुछ वर्षों के दौरान शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी और वैचारिक चेतना में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। इसी बदलाव की पृष्ठभूमि में टीचर्स ऑफ बिहार एक ऐसे मंच के रूप में उभरा है, जिसने शिक्षकों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर शिक्षा नीति, नवाचार और शिक्षक अधिकारों पर संवाद के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया है।

टीचर्स ऑफ बिहार की पहचान एक ऐसे शिक्षक समूह के रूप में बन रही है, जो बिना किसी औपचारिक संस्थागत दबाव के सहयोग, अनुभव-साझाकरण और रचनात्मक पहल को प्राथमिकता देता है। मंच से जुड़े शिक्षक डिजिटल माध्यमों के ज़रिये न केवल अपने नवाचार साझा कर रहे हैं, बल्कि सरकारी विद्यालयों की जमीनी चुनौतियों पर भी गंभीर और सार्थक विमर्श कर रहे हैं।

डिजिटल संवाद से बढ़ी भागीदारी....

मंच की गतिविधियों में ऑनलाइन बैठकें, शैक्षणिक चर्चाएँ और नवाचार आधारित संवाद प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके माध्यम से राज्य के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक भी मुख्यधारा के शैक्षणिक विमर्श से जुड़ पा रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सहभागिता शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सहभागी और प्रभावी बना रही है।

सम्मान से अधिक सशक्तिकरण पर ज़ोर....

टीचर्स ऑफ बिहार की विशेषता यह है कि यह मंच औपचारिक सम्मान या पुरस्कार की बजाय शिक्षक की व्यावसायिक गरिमा, अधिकार और कार्य की गुणवत्ता को महत्व देता है।
मंच से जुड़े शिक्षकों का मानना है कि शिक्षक का वास्तविक सम्मान उसके कक्षा-कक्ष में किए गए नवाचार और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर से तय होता है।

नीतिगत विषयों पर सक्रिय भूमिका....

शिक्षा से जुड़े नीतिगत निर्णयों, शिक्षक हितों और विद्यालयी सुधार से संबंधित विषयों पर टीचर्स ऑफ बिहार समय-समय पर अपने विचार सार्वजनिक करता रहा है। इससे यह मंच शिक्षक और नीति-निर्माण के बीच संवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में भी उभर रहा है।

भविष्य की संभावनाएँ....

शैक्षणिक जानकारों के अनुसार, यदि ऐसे शिक्षक-आधारित मंचों को रचनात्मक समर्थन मिलता रहा, तो यह बिहार की शिक्षा व्यवस्था में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन का मजबूत आधार बन सकते हैं।
टीचर्स ऑफ बिहार आज एक संगठन से आगे बढ़कर शिक्षा परिवर्तन के साझा विचार के रूप में स्थापित हो रहा है, जहाँ शिक्षक केवल श्रोता नहीं, बल्कि परिवर्तन के सक्रिय भागीदार हैं।

पदाधिकारियों के विचार....

टीचर्स ऑफ बिहार के फाउंडर शिव कुमार एवं टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने संयुक्त रूप से कहा कि यह मंच शिक्षकों की सामूहिक शक्ति और सकारात्मक सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षक सशक्तिकरण को मजबूती देना है।

वहीं प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने कहा कि टीचर्स ऑफ बिहार निरंतर संवाद, नवाचार और सहयोग के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में रचनात्मक बदलाव की दिशा में कार्य कर रहा है।

निष्कर्ष....

कुल मिलाकर, टीचर्स ऑफ बिहार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा में परिवर्तन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि शिक्षकों की जागरूक भागीदारी, संवाद और नवाचार से संभव है। यह मंच शिक्षकों को संगठित करने के साथ-साथ उन्हें सोचने, बोलने और बदलाव का नेतृत्व करने का अवसर दे रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे शिक्षक-आधारित मंचों को निरंतर समर्थन और सकारात्मक दिशा मिलती रही, तो बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था आने वाले वर्षों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार के नए मानक स्थापित कर सकती है।
टीचर्स ऑफ बिहार आज एक संगठन नहीं, बल्कि शिक्षा परिवर्तन का साझा संकल्प बन चुका है, जहाँ शिक्षक स्वयं बदलाव के सूत्रधार हैं।

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