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यूजीसी के नए नियमों पर युद्धी राणा का तीखा हमला, समिति में शामिल सामान्य वर्ग के नेताओं को बताया ‘समाज का गद्दार’

नई दिल्ली।
श्री राजपूत करणी सेना के युवा क्षेत्रीय अध्यक्ष युद्धी राणा (युधिष्ठिर राणा) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर केंद्र सरकार और नियम निर्माण समिति पर सीधा और तीखा प्रहार किया है। युद्धी राणा ने कहा कि ये नियम न केवल उच्च शिक्षा की आत्मा के विपरीत हैं, बल्कि सामान्य वर्ग के छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खुला अन्याय भी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा नीति में किसी भी प्रकार का भेदभाव समाज को कमजोर करने का काम करता है।

युद्धी राणा ने विशेष रूप से उस संसदीय समिति की भूमिका पर सवाल उठाए, जिसमें बड़ी संख्या में ऐसे नेता शामिल हैं जिन्हें सामान्य वर्ग का प्रतिनिधि माना जाता है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि कोई नेता सामान्य वर्ग से आते हुए भी ऐसे नियमों का समर्थन करता है, जो समाज और युवाओं के हितों के खिलाफ हैं, तो उसे समाज का “गद्दार” कहना गलत नहीं है। उनके अनुसार अब समाज को चेहरे और पद नहीं, बल्कि नीतियों और साहस के आधार पर नेतृत्व को परखना चाहिए।

उन्होंने संसद की वेबसाइट का हवाला देते हुए बताया कि इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह, भीम सिंह, बिकास रंजन भट्टाचार्य, घनश्याम तिवाड़ी, रेखा शर्मा, सी. सदानंदन मास्टर, सिकंदर कुमार, सुनेत्रा पवार और स्वाती मालीवाल शामिल हैं। वहीं लोकसभा से पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता व प्रवक्ता संबित पात्रा, पूर्व कलकत्ता हाईकोर्ट के जज अभिजित गंगोपाध्याय, बांसुरी स्वराज, अमर शरदराव काले, अंगोमचा बिमोल अकोईजाम, बृजमोहन अग्रवाल, दग्गुबाती पूरनदेश्वरी और दर्शन सिंह चौधरी जैसे सांसद भी इस समिति का हिस्सा हैं।

युद्धी राणा ने कहा कि इतने प्रभावशाली नामों की मौजूदगी के बावजूद अगर निर्णय युवाओं के विरुद्ध लिए जाते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने साफ किया कि यह लड़ाई किसी जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा में समानता, न्याय और सामान्य वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए है। करणी सेना युवा शक्ति इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

लेख: ऋषभ पराशर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, AIMA मीडिया युवा प्रकोष्ठ

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