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सालिहाघाट में रेत–गिट्टी माफियाओं का कहर! 70–80 ट्रैक्टर रोज़ गांव की गलियों से दौड़ाए जा रहे

ग्राम पंचायत सालिहाघाट में अवैध रेत और गिट्टी परिवहन ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है। पंचायत द्वारा बार-बार की गई रोक-टोक और समझाइश को दरकिनार करते हुए प्रतिदिन 70 से 80 ट्रैक्टर गांव की टेढ़ी-मेढ़ी और संकरी गलियों से दौड़ाए जा रहे हैं। आसपास के क्रेशरों से आने वाली सैकड़ों गिट्टी लोडेड ट्रैक्टर-ट्रालियां भी दिन-रात इन्हीं गलियों से होकर गुजरती हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
धूल, शोर और टूटी सड़कें—ग्रामीण परेशान
भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही ने गांव की सड़कों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। धूल और मिट्टी के कारण लोगों का घरों में बैठना भी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा जोखिम में है। स्कूल जाने वाले बच्चे रोज़ हादसे के डर में सड़क पार करते हैं।
सरपंच ने बनवाया वैकल्पिक मार्ग, फिर भी गांव में ट्रैक्टरों का आतंक
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सरपंच ने पंचायत निधि से एक वैकल्पिक मार्ग तैयार कराया है, जो बरसात सहित हर मौसम में सुगम है। इसके बावजूद माफिया गांव के भीतर की गलियों को ही तरजीह दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच-पड़ताल और विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए जानबूझकर गांव के भीतरी हिस्से से परिवहन किया जा रहा है।
“कहने पर भी नहीं मानते”—सरपंच का आरोप
सरपंच ने बताया कि कई बार अवैध परिवहन करने वालों को गांव की गलियों से न आने की समझाइश दी गई, लेकिन किसी ने पालन नहीं किया।
उन्होंने कहा—
“गांव की शांति और सुरक्षा को रौंदकर ये लोग खुलेआम अवैध कारोबार चला रहे हैं। पंचायत भी असहाय महसूस कर रही है, तो आम ग्रामीण किससे न्याय मांगें?”
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
लगातार बढ़ रहे इस अवैध परिवहन को लेकर ग्रामीणों में भय और आक्रोश है। उनका कहना है कि जब पंचायत प्रतिनिधि तक इनपर काबू नहीं कर पा रहे, तो फिर प्रशासन की क्या भूमिका है? विभागों की चुप्पी माफियाओं के हौसले और बढ़ा रही है।
ग्रामीणों की मांग—अब लगेगी लगाम?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और खनिज विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें—
गांव के भीतर से भारी वाहनों का आवागमन तत्काल बंद किया जाए
वैकल्पिक मार्ग का अनिवार्य रूप से उपयोग कराया जाए
अवैध खनन व परिवहन में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए
ग्रामीणों को अब इंतजार है कि क्या प्रशासन जागेगा या फिर माफिया इसी तरह कानून को ठेंगा दिखाते रहेंगे।

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