मातानामढ़ में GMDC के जनरल मैनेजर भायल साहेब के सम्मान में भावनात्मक विदाई समारोह आयोजित
मातानामढ़ में GMDC के जनरल मैनेजर भायल साहब का भावपूर्ण विदाई समारोह आयोजित
मातानामढ़
आज मातानामढ़ में GMDC के जनरल मैनेजर श्री भायल साहब के सेवानिवृत्ति/स्थानांतरण के अवसर पर एक भावनात्मक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर GMDC के कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। लोगों की उपस्थिति से यह स्पष्ट झलक रहा था कि क्षेत्र की जनता उनके प्रति गहरा सम्मान और स्नेह रखती है।
अपने कार्यकाल के दौरान भायल साहब ने पर्यावरण संरक्षण, कृषि, पशुपालन तथा मातानामढ़ एवं आसपास के क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी कार्यशैली सदैव जनकेन्द्रित रही, जिसमें स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता देकर मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण से समाधान किया गया।
मातानामढ़ में GMDC की स्थापना के बाद क्षेत्र के अनेक स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। सुरक्षा सेवाओं, वाहन चालक, तकनीकी विभाग एवं अन्य क्षेत्रों में मिली नौकरियों से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।
इसके साथ ही GMDC परियोजनाओं से स्थानीय ट्रक मालिकों को भी बड़ा लाभ हुआ, जिससे परिवहन क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास देखने को मिला। इसका सकारात्मक प्रभाव स्थानीय दुकानदारों, सेवा प्रदाताओं एवं छोटे व्यापारियों पर भी पड़ा, जिससे पूरे मातानामढ़ क्षेत्र का आर्थिक विकास हुआ।
जनरल मैनेजर भायल साहब की सहयोगी, संवेदनशील और स्थानीय हितों पर केंद्रित नेतृत्व शैली ही इस प्रगति की मूल वजह रही। उनके प्रयासों से GMDC और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास का मजबूत सेतु बना।
उनके विदाई के साथ क्षेत्र में भावुक वातावरण जरूर है, लेकिन उनके मार्गदर्शन में शुरू किए गए विकास कार्यों की विरासत सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायक बनी रहेगी।
🌸 भावपूर्ण विदाई कविता – भायल साहब 🌸
आज मातानामढ़ की मिट्टी भी यादों से बोल उठी,
विदाई के पलों में हर आंख नम हो उठी।
न थे आप केवल कुर्सी पर बैठे अधिकारी,
हर पल रहे आप जनता के सच्चे हितकारी।
पर्यावरण, खेती, पशुधन — सबका रखा संतुलन,
स्थानीय विकास को दिया आपने नया संबल।
सुरक्षा में रोजगार से घरों में उजाला आया,
युवाओं के सपनों ने नई राह को पाया।
ड्राइवर, तकनीशियन, ट्रक मालिकों में विश्वास जगा,
GMDC और जनता के बीच भरोसे का सेतु सजा।
दुकानें, सेवाएं, व्यापार सब आगे बढ़ते गए,
आपकी मानवीय सोच से हर दिल जुड़ते गए।
आज विदाई है, पर आपके कर्म अमर रहेंगे,
विकास के इतिहास में आपका नाम चमकते रहेंगे।
मातानामढ़ गर्व से कहेगा कृतज्ञता के साथ,
“आप गए, पर प्रगति की राह छोड़ गए हमारे हाथ।”
🙏 यह विदाई नहीं, बल्कि कृतज्ञता से भरा सम्मान है 🙏