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इंदौर | संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य भगत जगदीश दास पिता बलराम जी ने किया देह दान

इंदौर | संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य भगत जगदीश दास पिता बलराम जी ने अपने जीवन में एक ऐसा महान निर्णय लिया, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया। उन्होंने यह संकल्प लिया था कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर मानवता के काम आए। उनका यह विचार केवल व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि समाज कल्याण से जुड़ा एक उच्च आदर्श था।

आज उनके निधन के पश्चात, उनके परिवारजनों द्वारा उनका देहदान MGM मेडिकल कॉलेज, इंदौर में किया गया। यह देह मेडिकल छात्रों के लिए एक अमूल्य धरोहर है, जो उन्हें मानव शरीर की गहन समझ, व्यावहारिक प्रशिक्षण और बेहतर चिकित्सा सेवा के लिए सक्षम बनाएगी। इससे आने वाले छात्र केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार चिकित्सक भी बनेंगे।

यहीं पर यह समझना आवश्यक है कि ऐसे विचार अचानक उत्पन्न नहीं होते। यह सोच संत रामपाल जी महाराज की उन शिक्षाओं से जुड़ी है, जिनमें वे अपने सत्संगो में स्पष्ट रूप से बताते हैं कि यह शरीर नश्वर है और इसका सर्वोत्तम उपयोग दूसरों के कल्याण में होना चाहिए।

इसी आध्यात्मिक ज्ञान से प्रेरित होकर उनके अनुयायी देहदान जैसे पुण्य कार्य को अपनाते हैं, ताकि मृत्यु के बाद भी यह शरीर ज्ञान, सेवा और जीवन रक्षा का माध्यम बन सके। भगत जगदीश दास जी का यह निर्णय उसी आध्यात्मिक समझ का सजीव उदाहरण है।
यह कार्य हमें यह सिखाता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि सेवा का विस्तार हो सकती है।
ऐसी प्रेरणा, ऐसा त्याग और ऐसा विचार समाज को नई दिशा देता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए मानवता का मजबूत संदेश छोड़ जाता है।

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