
भारतीय वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा चलने वाला स्व-चार्जिंग ऊर्जा भंडारण उपकरण विकसित किया है।
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित फोटो-कैपेसिटर नामक अभिनव सौर ऊर्जा-संचालित सुपरकैपेसिटर एक ही एकीकृत उपकरण में सौर ऊर्जा को लेने और उसे संग्रहीत करने के दोनों काम कर सकता है।
यह स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम हो सकता है, जो कही ले जाने तथा पहनने योग्य और ऑफ ग्रिड प्रौद्योगिकियों के लिए कुशल, कम लागत वाले और पर्यावरण के अनुकूल बिजली समाधानों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
परंपरागत रूप से, सौर ऊर्जा प्रणालियां दो अलग-अलग इकाइयों पर निर्भर करती हैं: ऊर्जा संग्रहण के लिए सौर पैनल और ऊर्जा भंडारण के लिए बैटरी या सुपरकैपेसिटर। यद्यपि ऐसी हाइब्रिड प्रणालियां बड़े पैमाने के सौर फार्मों से लेकर पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं, फिर भी ऊर्जा संग्रहण इकाई और भंडारण इकाई के बीच वोल्टेज और करंट के असंतुलन को नियंत्रित करने के लिए इनमें अतिरिक्त विद्युत प्रबंधन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता को पूरा करने से प्रणाली की जटिलता, लागत, ऊर्जा हानि और उपकरण का आकार बढ़ जाता है, जो विशेष रूप से लघु और स्वायत्त उपकरणों के लिए हानिकारक साबित होता है।
सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान, सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बेंगलुरु द्वारा विकसित इस नए फोटो-रिचार्जेबल सुपरकैपेसिटर ने सूर्य के प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने और उस ऊर्जा को बाद में उपयोग के लिए संग्रहित करने की दोनों प्रक्रियाओं को सहजता से संयोजित किया है। इससे डिजाइन सरल हो जाता है और रूपांतरण तथा भंडारण के दौरान ऊर्जा हानि कम से कम हो जाती है।
डॉ. कविता पांडे के मार्गदर्शन में, बाइंडर-मुक्त निकल-कोबाल्ट ऑक्साइड (NiCo 2 O 4 ) नैनोवायरों के उपयोग की मदद से नवाचार किया गया है। इन्हें एक सरल इन सीटू हाइड्रोथर्मल प्रक्रिया का उपयोग करके निकल फोम पर समान रूप से तैयार किया गया है।
केवल कुछ नैनोमीटर और लंबाई कई माइक्रोमीटर व्यास वाले ये नैनोवायर अत्यंत छिद्रपूर्ण और सुचालक 3डी नेटवर्क बनाते हैं जो सूर्य के प्रकाश को कुशलतापूर्वक अवशोषित करता है और विद्युत आवेश को संग्रहित करता है। इस अनूठी संरचना के कारण यह पदार्थ एक साथ सौर ऊर्जा संग्राहक और सुपरकैपेसिटर इलेक्ट्रोड के रूप में कार्य कर सकता है।
परीक्षण करने पर, NiCo₂O₄ इलेक्ट्रोड ने प्रकाश की उपस्थिति के दौरान धारिता में उल्लेखनीय 54 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई है। यह 15 mA cm⁻² की धारा घनत्व पर 570 से बढ़कर 880 mF cm⁻² हो गई । यह असाधारण प्रदर्शन नैनोवायर नेटवर्क के भीतर प्रकाश-प्रेरित आवेश वाहकों के कुशल उत्पादन और स्थानांतरण के कारण संभव हुआ। 10,000 आवेश-अस्वीकरण चक्रों के बाद भी, इलेक्ट्रोड ने अपनी मूल क्षमता का 85 प्रतिशत बरकरार रखा है। यह इसकी व्यावहारिक अनुप्रयोगों के लिए एक आवश्यक विशेषता दीर्घकालिक स्थिरता को दर्शाता है।
इसकी वास्तविक उपयोगिता का मूल्यांकन करने के लिए, शोधकर्ताओं ने सक्रिय कार्बन को ऋणात्मक इलेक्ट्रोड और NiCo₂O₄ नैनोवायर को धनात्मक इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग करके एक असममित फोटो-सुपरकैपेसिटर तैयार किया। इस उपकरण ने 1.2 वोल्ट का स्थिर आउटपुट वोल्टेज प्रदान किया, 1,000 फोटो-चार्जिंग चक्रों के बाद भी अपनी धारिता का 88 प्रतिशत बनाए रखा, और कम रोशनी से लेकर तीव्र सूर्य की रोशनी तक, विभिन्न सूर्यप्रकाश स्थितियों में कुशलतापूर्वक कार्य किया। यह स्थिरता दर्शाती है कि नैनोवायर संरचना लंबे समय तक उपयोग के दौरान यांत्रिक और विद्युत रासायनिक दोनों प्रकार के तनाव को सहन कर सकती है।
सूर्य के प्रकाश को इकट्ठा करने और ऊर्जा भंडारण को एक ही उपकरण में एकीकृत करके, टीम ने स्व-चार्जिंग पावर सिस्टम विकसित किए हैं। जहां बिजली ग्रिड नहीं है उन दूरदराज के क्षेत्रों में भी काम कर सकते हैं है।
ऐसी तकनीक गैर नवीकरणीय ईंधन और पारंपरिक बैटरियों पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकती है, इससे एक टिकाऊ और हरित ऊर्जा भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रायोगिक अध्ययन के अलावा, NiCo₂O₄ नैनोवायर प्रणाली के इतने कुशल प्रदर्शन के कारणों को समझने के लिए सैद्धांतिक अध्ययन भी किया गया ।
इस अध्ययन से पता चला है कि कोबाल्ट ऑक्साइड संरचना में निकेल के प्रतिस्थापन से बैंड गैप लगभग 1.67 ईवी तक कम हो जाता है और अर्ध-धात्विक व्यवहार उत्पन्न होता है। इसका अर्थ है कि पदार्थ एक प्रकार के इलेक्ट्रॉन स्पिन के लिए अर्धचालक के रूप में व्यवहार करता है और दूसरे प्रकार के लिए धात्विक बना रहता है। यह एक दुर्लभ दोहरा गुण है जो तीव्र आवेश परिवहन और उच्च विद्युत चालकता को सक्षम बनाता है। इस प्रकार की स्पिन-निर्भर चालकता फोटो-सहायता प्राप्त आवेश भंडारण अनुप्रयोगों के लिए विशेष रूप से मूल्यवान है।
सतत ऊर्जा अनुसंधान के तहत एक ही संरचना में सूर्य के प्रकाश को ग्रहण करने और चार्ज भंडारण को एकीकृत करने के लक्ष्य को प्राप्त करने का काम लंबे समय से चल रहा है।
यह अध्ययन पदार्थ अनुसंधान में प्रायोगिक और सैद्धांतिक अंतर्दृष्टियों के बीच तालमेल को भी दर्शाता है। प्रयोगों ने बढ़ी हुई धारिता और स्थायित्व की पुष्टि की, वहीं सैद्धांतिक सिमुलेशन ने इन सुधारों को संचालित करने वाले परमाणु-स्तरीय तंत्रों को उजागर किया। ये दोनों मिलकर इस बात की व्यापक समझ प्रदान करते हैं कि नैनो-संरचित पदार्थों को प्रकाश-संवेदनशील ऊर्जा भंडारण के लिए कैसे अनुकूलित किया जा सकता है।
रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री जर्नल के 'सस्टेनेबल एनर्जी एंड फ्यूल्स' में प्रकाशित इस शोध में स्मार्ट, फोटो-रिचार्जेबल ऊर्जा भंडारण उपकरणों की एक नई श्रेणी का परिचय दिया गया है। कुल मिलाकर, यह शोध नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास के लिए ऐसे उपकरण देश की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने और विश्व स्तर पर इसी तरह के नवाचारों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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