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नरेश मीणा के ‘जयपुर कूच’ से खलबली, आधी रात बाद प्रशासन ने ले लिया ‘एक्शन’!

कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने आमली मोड़ के पास भारी बैरिकेडिंग कर दी और काफिले को रोक दिया। रात होते-होते हाईवे पर तनाव बढ़ गया।
राजस्थान की सियासत में 'आंदोलनकारी' छवि बना चुके नरेश मीणा ने एक बार फिर अपनी ताकत का अहसास कराया। शुक्रवार को टोंक के उनियारा से शुरू हुआ उनका 'जयपुर कूच' शनिवार तड़के करीब 1 बजे प्रशासन के साथ हुई लंबी वार्ता के बाद ख़त्म हो गया। कड़ाके की ठंड के बीच नेशनल हाईवे 116 पर डटे नरेश मीणा और उनके समर्थकों को प्रशासन ने लिखित आश्वासन देकर शांत किया।

आमली मोड़ पर हाई वोल्टेज ड्रामा
शुक्रवार शाम को नरेश मीणा ने सोप थाना क्षेत्र के कोटड़ी मोड़ पर एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद उन्होंने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ जयपुर की ओर कूच करने का ऐलान किया। कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने आमली मोड़ के पास भारी बैरिकेडिंग कर दी और काफिले को रोक दिया। रात होते-होते हाईवे पर तनाव बढ़ गया।

रात 1 बजे तक 'मान-मनौव्वल'
हालात को भांपते हुए टोंक के एडीएम रामरतन सौंकरिया और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतनलाल भार्गव मौके पर पहुंचे। नरेश मीणा सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े थे। रात 11 बजे के बाद बातचीत का दौर तेज़ हुआ और अजमेर के संभागीय आयुक्त से नरेश मीणा की फोन पर सीधी बात करवाई गई। इसके बाद प्रशासन ने एक लिखित प्रगति रिपोर्ट सौंपी, जिसमें मांगों पर हुई अब तक की कार्रवाई का ब्यौरा सौंपा गया।
इन मांगों पर बनी सहमति !
प्रशासन और नरेश मीणा के बीच मुख्य रूप से 12 सूत्री मांगों पर सहमति बनी है। इसमें सबसे अहम समरावता कांड से जुड़े मुद्दे बताये गए हैं। जानकारी के मुताबिक़ सरकार ने समरावता हिंसा से जुड़े मुकदमों को वापस लेने की मांग पर सकारात्मक रुख अपनाने का वादा किया है। सोप थाने के उन पुलिसकर्मियों पर जांच शुरू करने पर भी सहमति बनी है, जिन पर ग्रामीणों और महिलाओं के साथ अभद्रता के आरोप थे।

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