
छतरपुर में रिश्वत लेते अधिकारी पकड़े गए, फिर उठा भ्रष्टाचार पर बड़ा सवाल
Umaria - Jan Jan ki Awaj
सरकारी वेतन के बावजूद रिश्वतखोरी: आखिर कब बदलेगा सिस्टम?
मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन कोई न कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा जा रहा है। ताज़ा मामला छतरपुर जिले की नगर परिषद बकस्वाहा से सामने आया है, जहाँ आवासीय पट्टा और प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते एक महिला अधिकारी और उपयंत्री को पकड़ा गया है।
शिकायतकर्ता हरिओम अहिरवार के अनुसार, मुख्य नगर अधिकारी ने उनके आवासीय पट्टा और पीएम आवास के आवेदन के बदले पैसों की मांग की थी। जांच में सामने आया कि राशि सीधे न लेकर उपयंत्री के माध्यम से ली जा रही थी। जैसे ही उपयंत्री ने रिश्वत की रकम ली, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। केमिकल टेस्ट में नोट गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता…
जब सरकार आपको समय पर वेतन दे रही है, पद और सम्मान दे रही है, तो फिर रिश्वत की जरूरत क्यों?
क्या भोग-विलास की लालसा इंसान को इतना गिरा देती है?
आज यह सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
क्या आपके माता-पिता ने आपको यही संस्कार दिए थे?
क्या आप अपने बच्चों को भी यही सिखाएंगे कि सरकारी कुर्सी का इस्तेमाल जनता को लूटने के लिए किया जाए?
जरा सोचिए—
क्या आप अपने परिवार, रिश्तेदारों या समाज के सामने आंख मिलाकर खड़े हो सकते हैं?
क्या यह अवैध कमाई आपको सुकून दे पाएगी?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं रह गया है।
आज हर दूसरा या तीसरा कर्मचारी किसी न किसी रूप में इसमें लिप्त नजर आता है।
सिर्फ रिश्वतखोर पकड़ने से समस्या खत्म नहीं होगी।
जब तक सोच नहीं बदलेगी, तब तक सिस्टम नहीं बदलेगा।
अब वक्त आ गया है कि हम सिर्फ खबर पढ़कर आगे न बढ़ें,
बल्कि एक ईमानदार, जिम्मेदार और बेहतर समाज के निर्माण की मांग करें।
क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई
सिर्फ कानून से नहीं, चरित्र से जीती जाती है।