
अवैध आर्थिक घुसपैठ पर सख़्त रुख: असम सरकार ने PWD ठेकेदारों के लिए नए श्रम नियम किए लागू
असम में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों द्वारा की जा रही तथाकथित “आर्थिक घुसपैठ” पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बड़ा और सख़्त नीतिगत फैसला लिया है। राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत कार्य कर रहे सभी ठेकेदारों के लिए नए श्रम नियम लागू करने की घोषणा की है, जिन्हें पूरे राज्य में सख्ती से लागू किया जाएगा।मुख्यमंत्री द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, PWD की सभी परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिकों में कम से कम 50 प्रतिशत श्रमिक असम के स्थानीय और स्वदेशी निवासी होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, यदि शेष श्रमिकों की नियुक्ति मिया समुदाय से की जाती है, तो केवल उन्हीं लोगों को रोजगार दिया जाएगा जिनके पूर्वज वर्ष 1951 से पहले असम में बसे हुए थे। यह शर्त असम की ऐतिहासिक जनगणना और कट-ऑफ तिथि के अनुरूप रखी गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करना, यह सुनिश्चित करना कि सरकारी धन का लाभ सीधे असम के स्वदेशी समुदायों तक पहुंचे, और अवैध प्रवासी श्रम शक्ति के वर्चस्व को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक सुरक्षा सीधे तौर पर जनसांख्यिकीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है, और सरकार किसी भी हाल में सार्वजनिक परियोजनाओं को अवैध रोजगार का माध्यम नहीं बनने देगी। सरकार के अनुसार, यह निर्देश सख्ती से लागू किया जाएगा, और नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, ठेका रद्द करने और अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जाएगा, ताकि नियम केवल कागज़ों तक सीमित न रह जाएं। इस फैसले के बाद राज्यभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर सरकार इसे असम के दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न वर्गों से इस पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सरकार का कहना है कि यह नीति स्थानीय पहचान, रोजगार सुरक्षा और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम है और भविष्य में भी असम के हितों से जुड़े ऐसे फैसले लिए जाते रहेंगे।