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मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के नेतृत्व में न्यायिक व्यवस्था में एक और बड़ा सुधार


भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक सुधारों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट एक एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य देशभर की अदालतों में लंबित मामलों की निगरानी, प्रबंधन और त्वरित निपटान को प्रभावी बनाना है। इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मामलों की स्थिति स्वतः अपडेट होती रहेगी। वादकारियों और अधिवक्ताओं को केस स्टेटस की वास्तविक समय (रियल-टाइम) जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे बार-बार अदालत या रजिस्ट्री के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी। इसके साथ ही इस प्लेटफॉर्म में डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्वचालित रिकॉर्ड प्रबंधन और डेटा-आधारित विश्लेषण जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी। न्यायालय सूत्रों के अनुसार, यह एआई-संचालित प्रणाली लंबित मामलों के पैटर्न का विश्लेषण कर यह भी बताएगी कि किन अदालतों या किन प्रकार के मामलों में देरी अधिक हो रही है। इससे न्यायिक प्रशासन को नीतिगत निर्णय लेने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा, जिन्हें न्याय मिलने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और तेज होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के इस कदम को न्यायिक प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल लंबित मामलों के बोझ को कम करने में सहायक होगी, बल्कि न्यायपालिका पर जनता के विश्वास को भी और मजबूत करेगी। कुल मिलाकर, यह नई डिजिटल व्यवस्था “त्वरित न्याय” के संवैधानिक लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास है, जो भारतीय न्याय प्रणाली को आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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