सोनभद्र में सरकारी ज़मीन पर बड़ा खेल! फोरलेन के नाम पर पट्टा घोटाला उजागर, लेखपाल निलंबित
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सरकारी ज़मीनों पर चल रहे खेल का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रॉबर्ट्सगंज विकासखंड अंतर्गत लसड़ा ग्राम पंचायत में सरकारी भूमि के पट्टों को लेकर बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि ग्राम प्रधान, लेखपाल, कानूनगो, आरके और तहसीलदार की कथित मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर अपात्र व्यक्तियों को सरकारी भूमि का पट्टा आवंटित कर दिया गया।
मामले के उजागर होते ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके दबाव में प्रशासन को जांच कर कार्रवाई करनी पड़ी।
फोरलेन बना लालच, सरकारी ज़मीन बना मुनाफे का साधन
बताया जा रहा है कि घोरावल से खलियारी तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण के चलते सड़क किनारे स्थित सरकारी भूमि की कीमत में अचानक भारी उछाल आया। इसी संभावित मुआवजे की लालच में बहुमूल्य सरकारी ज़मीन को चुनिंदा लोगों के नाम पट्टे पर चढ़ा दिया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त भूमि पर पहले से कुछ गरीब परिवार गुमटी लगाकर अपनी रोज़ी-रोटी चला रहे थे। पट्टा होते ही दबंगों द्वारा ज़मीन पर कब्ज़े के प्रयास और मारपीट की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद पूरा मामला उजागर हुआ।
जिन्हें मिला पट्टा, वे पहले से संपन्न
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन लोगों के नाम पर पट्टे किए गए हैं, उनके पास पहले से ही पर्याप्त ज़मीन, पक्के मकान, वाहन और परिवार में सरकारी नौकरी तक मौजूद है। इसके बावजूद पात्रता के सभी मानकों को दरकिनार कर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
जांच में प्रधान सहित पांच की भूमिका संदिग्ध
शिकायत के बाद उपजिलाधिकारी सदर द्वारा कराई गई जांच में ग्राम प्रधान समेत पांच लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
प्रारंभिक कार्रवाई के तहत लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है, जबकि अन्य आरोपितों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की संस्तुति जिलाधिकारी को भेजी गई है।
सवालों के घेरे में प्रशासनिक तंत्र
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी ज़मीनों के आवंटन में पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी संपत्ति की इस तरह की लूट पर लगाम लग सके।