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संवेदनशील प्रशासन और मानवीय सरोकारों की प्रेरक मिसाल — एसबीआई निवाली शाखा प्रबंधक पीयूष जोशी से प्रेरक भेंट

आज के यांत्रिक और व्यस्त समय में जब औपचारिकता मानवीय संबंधों पर हावी होती जा रही है, ऐसे में कुछ मुलाकातें मन को भीतर तक स्पर्श कर जाती हैं। हाल ही में एसबीआई निवाली शाखा के शाखा प्रबंधक श्री पीयूष जोशी से हुई मेरी भेंट ऐसी ही एक प्रेरणादायक अनुभूति रही।
श्री जोशी अत्यंत मृदुभाषी, सरल स्वभाव और संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी हैं। बातचीत के दौरान जब उन्हें यह जानकारी मिली कि मैं एक लेखक होने के साथ-साथ दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता भी हूँ, तो उनके चेहरे पर आत्मीय प्रसन्नता स्पष्ट दिखाई दी। उन्होंने न केवल लेखन कार्य के प्रति सम्मान व्यक्त किया, बल्कि स्नेहपूर्वक एक बॉल पेन भेंट कर यह संदेश दिया कि विचारों की अभिव्यक्ति और सकारात्मक लेखनी कभी रुकनी नहीं चाहिए।
यह भेंट केवल औपचारिक संवाद तक सीमित नहीं रही। श्री जोशी ने अत्यंत मानवीय संवेदना के साथ यह कहा कि यदि किसी भी दिव्यांगजन को किसी प्रकार के सहायक उपकरण अथवा सहयोग की आवश्यकता हो, तो उन्हें अवश्य अवगत कराया जाए—और वे यथासंभव सहायता प्रदान करेंगे। उनका यह कथन सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रशासनिक संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
आज समाज को ऐसे ही अधिकारियों की आवश्यकता है, जो अपने पद को केवल दायित्व न मानकर सेवा का माध्यम समझें। *श्री पीयूष जोशी* जैसे व्यक्तित्व यह सिद्ध करते हैं कि जब प्रशासनिक भूमिका के साथ करुणा और सहयोग की भावना जुड़ती है, तब सामाजिक परिवर्तन की राह स्वतः प्रशस्त हो जाती है।
यह प्रेरक मुलाकात यह विश्वास दिलाती है कि यदि प्रत्येक क्षेत्र में ऐसे संवेदनशील लोग आगे आएँ, तो दिव्यांगजन ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज आत्मनिर्भर, सशक्त और समर्थ बन सकता है। यही भावना वास्तव में “सक्षम भारत – समर्थ भारत” के संकल्प को साकार करती है।
— चतरसिंह गेहलोत
शिक्षक, साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता

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