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विशेष खबर: पैंतबोझी में गणतंत्र दिवस पर नहीं लहराया तिरंगा, ग्रामीणों में भारी रोष; शासन के आदेशों की खुली अवहेलना

विशेष खबर- पैंतबोझी में गणतंत्र दिवस पर नहीं लहराया तिरंगा, ग्रामीणों में भारी रोष; शासन के आदेशों की खुली अवहेलना
पीलीभीत (बिलसंडा): जहाँ एक ओर पूरा देश 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवमयी पर्व को हर्षोल्लास के साथ मना रहा था, वहीं जनपद पीलीभीत के विकासखंड बिलसंडा की ग्राम पंचायत पैंतबोझी से एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यहाँ ग्राम पंचायत सचिवालय पर राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर ध्वजारोहण नहीं किया गया, जो वर्तमान सरकार के कड़े शासनादेशों और राष्ट्रीय मर्यादा का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम: सूना रहा पंचायत सचिवालय
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, 26 जनवरी की सुबह जब अन्य सरकारी संस्थानों पर आन-बान-शान के साथ तिरंगा फहराया जा रहा था, तब पैंतबोझी ग्राम पंचायत सचिवालय का परिसर सूना पड़ा था। ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) और अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों की अनुपस्थिति के चलते यहाँ ध्वजारोहण की रस्म तक अदा नहीं की गई।
शासन के आदेशों की अनदेखी
पीलीभीत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने गणतंत्र दिवस से पूर्व समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी सरकारी और अर्धसरकारी भवनों पर प्रातः 8:30 बजे ध्वजारोहण अनिवार्य रूप से किया जाए। पैंतबोझी में इस आदेश की अनदेखी न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अवमानना की श्रेणी में आती है।
ग्रामीणों में आक्रोश और जवाबदेही की माँग
इस घटना से स्थानीय ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि:
राष्ट्रीय पर्व का अपमान: यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि देश की एकता और अखंडता के प्रतीक का अपमान है।
अधिकारियों की मनमानी: ग्राम विकास में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों का इस तरह का रवैया उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
कड़ी कार्रवाई की माँग: ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से माँग की है कि संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी और लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल विभागीय जाँच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
क्या कहते हैं नियम?
भारतीय ध्वज संहिता और उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग के नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय पर्वों पर सार्वजनिक भवनों पर ससम्मान ध्वजारोहण करना संबंधित अधिकारी की संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस मामले में पंचायती राज विभाग द्वारा कठोर स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
निष्कर्ष:
देशभक्ति और अनुशासन के इस पर्व पर ऐसी घटनाएं प्रशासन की छवि को धूमिल करती हैं। अब देखना यह होगा कि जनपद के उच्चाधिकारी इस गंभीर विषय पर क्या एक्शन लेते हैं ताकि भविष्य में पैंतबोझी जैसी पुनरावृत्ति किसी अन्य पंचायत में न हो।

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