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विंटर स्ट्रोक से जुड़े मिथक और सच्चाई, सर्दियों में सुरक्षित रहने के लिए क्या जानना जरूरी है

सोनीपत: सर्दियों का मौसम जहां ठंडी सुबहों, गर्म पेयों और त्योहारों की खुशियां लेकर आता है, वहीं यह सेहत के लिए कुछ गंभीर जोखिम भी बढ़ा देता है। ठंड के मौसम में स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाना अब डॉक्टरों के लिए एक अहम चिंता का विषय है, क्योंकि कम तापमान शरीर की ब्लड सर्कुलेशन, ब्लड प्रेशर और ओवरऑल हेल्थ को प्रभावित करता है।


ठंड में ब्लड वेसल्स का सिकुड़ना, ब्लड का थोड़ा गाढ़ा होना और हार्ट पर बढ़ा हुआ प्रेशर, स्ट्रोक के रिस्क को बढ़ा सकते हैं। इसलिए सर्दियों में स्ट्रोक के खतरे को समझना और उससे जुड़े मिथकों और तथ्यों को जानना बेहद जरूरी है, ताकि आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें।


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. मनोज खनल ने बताया “अक्सर यह माना जाता है कि सर्दियों में स्ट्रोक केवल बुजुर्गों को होता है, जबकि सच्चाई यह है कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट डिजीज से जूझ रहे युवा और मिडिल एज लोग भी इसके खतरे में रहते हैं। ठंड का असर उम्र नहीं देखता, बल्कि यह शरीर की सर्कुलेशन पर सीधा प्रभाव डालता है। इसी तरह यह भी एक गलतफहमी है कि सिर्फ ठंड ही स्ट्रोक का कारण बनती है। दरअसल, ठंड खुद स्ट्रोक नहीं करती, बल्कि यह शरीर में ऐसी फिजियोलॉजिकल बदलाव शुरू करती है, जैसे ब्लड वेसल्स का सिकुड़ना और हार्ट रेट का बढ़ना, जो लाइफस्टाइल फैक्टर्स के साथ मिलकर रिस्क बढ़ाते हैं। कई लोग यह सोचते हैं कि घर के अंदर हीटर या रूम हीटिंग होने से स्ट्रोक का खतरा खत्म हो जाता है, लेकिन कम नमी और डिहाइड्रेशन भी अप्रत्यक्ष रूप से स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं। पर्याप्त पानी पीना और ह्यूमिडिटी बनाए रखना इसलिए जरूरी है।“


यह भी जरूरी नहीं कि केवल बहुत ज्यादा ठंड में ही खतरा हो। हल्की सर्दी, अचानक तापमान में बदलाव या सुबह-सुबह ठंड में बाहर निकलना भी सेंसिटिव लोगों में सर्कुलेटरी स्ट्रेस पैदा कर सकता है। वहीं स्ट्रोक के लक्षण हमेशा बहुत स्पष्ट हों, यह भी जरूरी नहीं। कई बार शुरुआती संकेत जैसे चक्कर आना, हल्की सुन्नता या असामान्य थकान को लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।


सर्दियों में दवाओं को लेकर भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस मौसम में ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल में उतार-चढ़ाव हो सकता है। डॉक्टर से नियमित सलाह लेकर मेडिकेशन को सही रखना जरूरी है। यह धारणा भी गलत है कि सर्दियों में स्ट्रोक को रोका नहीं जा सकता, जबकि सही डाइट, हाइड्रेशन, एक्टिव लाइफस्टाइल और नियमित मॉनिटरिंग से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। केवल बाहर की ठंड ही नहीं, बल्कि घर के अंदर कम फिजिकल एक्टिविटी, तनाव और डिहाइड्रेशन भी स्ट्रोक रिस्क को बढ़ाते हैं।


डॉ. मनोज ने आगे बताया “सर्दियों में स्ट्रोक से बचाव के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी आदतें अपनाई जा सकती हैं। ठंड में ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है, इसलिए इसे नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए। बाहर न निकल पाने की स्थिति में भी हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग या इंडोर वर्कआउट से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है। गर्म सूप, हर्बल टी और पर्याप्त पानी पीने से ब्लड गाढ़ा होने से बचता है। डाइट में फल, सब्जियां, होल ग्रेन्स और ओमेगा-3 से भरपूर फूड शामिल करना हार्ट और ब्रेन दोनों के लिए फायदेमंद है। बाहर जाते समय शरीर को अच्छी तरह ढकना, खासकर सिर और हाथ-पैर को गर्म रखना जरूरी है। सर्दियों में तनाव और थकान भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकती है, इसलिए रिलैक्सेशन और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान देना चाहिए। अचानक बहुत ठंड के संपर्क में आने से बचना भी जरूरी है।


स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना जान बचा सकता है। चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नता, बोलने या समझने में दिक्कत, आंखों से कम दिखना, बिना कारण तेज सिरदर्द या अचानक संतुलन बिगड़ना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए। कुछ शुरुआती और कम पहचाने जाने वाले संकेतों में भ्रम की स्थिति, असामान्य नींद या निगलने में परेशानी भी शामिल हो सकती है। समय पर इलाज से रिकवरी की संभावना काफी बेहतर हो जाती है।


सर्दियों में स्ट्रोक का खतरा वास्तविक है और यह तापमान, लाइफस्टाइल, डाइट, हाइड्रेशन और पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़ा होता है। सही जानकारी, मिथकों से दूरी, लक्षणों की समय पर पहचान और हेल्दी विंटर लाइफस्टाइल अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। थोड़ी सी सतर्कता और सही आदतें अपनाकर आप सर्दियों के मौसम में भी अपने दिल और दिमाग को सुरक्षित रख सकते हैं।

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