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उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुदृढ़ करने पर केंद्रित रही विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक के लिए स्थायी समिति की बैठक

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुदृढ़ करने पर केंद्रित रही विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक के लिए स्थायी समिति की बैठक

उच्च शिक्षा मंत्री श्री Inder Singh Parmar ने सभी कुलगुरुओं से विस्तार से चर्चा कर आवश्यक मार्गदर्शन दिया

राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक गुणवत्ता को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से बुधवार को भोपाल स्थित एमपीटी पलाश रेसीडेंसी के सभागार में, मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक के लिए स्थायी समिति की बैठक आयोजित की गई, इसमें उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया।

बैठक के दौरान मंत्री श्री परमार ने, सभी कुलगुरुओं से विस्तार से चर्चा की। श्री परमार ने विश्वविद्यालयों को प्रशासनिक पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया और विद्यार्थी केंद्रित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर बल दिया। श्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों का मुख्य लक्ष्य, विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होना चाहिए और इसी दृष्टि से सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियां संचालित की जानी चाहिए।

बैठक में चर्चा उपरांत अनुशंसा की गई कि सभी विश्वविद्यालयों को अपने-अपने पी-एच.डी. कैलेंडर वेबसाइट पर अपलोड करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को समय पर समस्त जानकारी उपलब्ध हो सके। साथ ही, स्वयं पोर्टल पर अधिक से अधिक विद्यार्थियों का पंजीयन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे छात्र विभिन्न शैक्षणिक सेवाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें।

स्थायी समिति की बैठक में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी पाठ्यक्रमों, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर के अनुमोदन, नवीन एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की संबद्धता शुल्क, विश्वविद्यालय कर्मियों की पेंशन व्यवस्था, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए नए अध्यादेश, गैर-हिंदी भाषाओं में सर्टिफिकेट व डिप्लोमा कोर्स, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन, अपार आईडी तथा डिजिटल शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श कर विभिन्न अनुशंसाएं की गईं।

विश्वविद्यालयों द्वारा महाविद्यालयों से लिए जाने वाले संबद्धता शुल्क पर पुनर्विचार करने, स्वशासी महाविद्यालयों से किसी प्रकार का संबद्धता शुल्क न लेने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शोध केंद्रों की मान्यता के लिए स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर न्यूनतम शुल्क निर्धारित करने की अनुशंसा की गई। इसके अतिरिक्त यह भी चर्चा हुई कि जैसे स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए माइक्रोबायोलॉजी, कंप्यूटर साइंस, बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषयों में शोध केंद्रों संबंधी व्यवस्था बनाई गई है, उसी प्रकार स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए भी समान व्यवस्था को मान्यता देने के लिए समन्वय समिति को अनुशंसा प्रस्तुत की जाये। गैर-हिंदी भाषाओं में संचालित पाठ्यक्रमों एवं स्वयं के पाठ्यक्रमों को विद्यार्थी द्वारा उत्तीर्ण करने पर अंकसूची में उसका स्पष्ट उल्लेख किए जाने की भी अनुशंसा की गई।

बैठक में सभी कुलगुरुओं ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों, सुधारात्मक प्रयासों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की तथा शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। स्थायी समिति की समस्त अनुशंसाएँ विश्वविद्यालय समन्वय समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की जाएंगी।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. अनिल कुमार पाठक सहित प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों के कुलगुरु एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

बैठक के दौरान मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से संबंधित जागरूकता-ब्रोशर का विमोचन भी किया। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार इस ब्रोशर में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों को सम्मिलित किया गया है। साथ ही, विद्यार्थियों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी भी इसमें दी गई है। ब्रोशर में उपलब्ध क्यूआर कोड को स्कैन कर विद्यार्थी एवं संस्थान माननीय सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित निर्णयों की संपूर्ण जानकारी सरलता से प्राप्त कर सकेंगे।

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Jansampark Madhya Pradesh

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