
*धर्मापुर में कथित अवैध मिशनरी आश्रम का मामला*
हिंदू जागरण मंच ने प्रशासन से की कड़ी कार्रवाई की मांग
*धर्मापुर में कथित अवैध मिशनरी आश्रम का मामला*
हिंदू जागरण मंच ने प्रशासन से की कड़ी कार्रवाई की मांग
राजनांदगांव*।
राजनांदगांव जिला मुख्यालय से लगभग 9 किलोमीटर दूर ग्राम धर्मापुर में संचालित एक कथित अवैध मिशनरी आश्रम को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। हिंदू जागरण मंच एवं स्थानीय नागरिकों ने आश्रम संचालन को अवैध बताते हुए प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आरोप है कि डेविड चाको नामक व्यक्ति द्वारा बीते कुछ वर्षों से ग्राम पंचायत से प्राप्त आवासीय निर्माण की एन.ओ.सी. की आड़ में अवैध गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं, जिनमें मतांतरण/धर्मांतरण जैसी गतिविधियाँ भी शामिल बताई जा रही हैं।
संदिग्ध गतिविधियों का आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उक्त परिसर में रात्रि के समय संदिग्ध वाहनों की आवाजाही बनी रहती थी तथा भोले-भाले ग्रामीणों को लालच व प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता था। मामला मीडिया में उजागर होने के बाद हिंदू संगठनों ने विरोध दर्ज कराते हुए कथित रूप से अघोषित चर्च व आश्रम को तत्काल बंद करने की मांग की है।
एन.ओ.सी. का दुरुपयोग, प्रशासन को गुमराह करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ग्राम पंचायत धर्मापुर से आवासीय भवन एवं सिलाई केंद्र के नाम पर एन.ओ.सी. प्राप्त की गई थी, किंतु वहां न तो सिलाई केंद्र संचालित हुआ और न ही स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप गतिविधियाँ की गईं। इसके स्थान पर अनाथ आश्रम एवं धार्मिक गतिविधियाँ संचालित किए जाने का आरोप है, वह भी बिना सक्षम विभागों की अनुमति के।
अवैध प्लाटिंग, भूमि डायवर्सन और नशा मुक्ति केंद्र पर सवाल
यह भी आरोप लगाया गया है कि अवैध प्लाटिंग की भूमि पर निर्मित भवन के लिए न तो भूमि डायवर्सन कराया गया और न ही नशा मुक्ति केंद्र संचालन की विधिवत अनुमति ली गई, जबकि पंजीयन इसी नाम से कराया गया था। वस्तुतः मौके पर किसी प्रकार का नशा मुक्ति केंद्र संचालित नहीं पाया गया।
करोड़ों की लागत, विदेशी फंडिंग की आशंका
संगठनों का दावा है कि उक्त भवन निर्माण में करोड़ों रुपये की लागत आई है। इस पर विदेशी फंडिंग की आशंका जताते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की गई है।
नाबालिग बच्चों के संरक्षण पर गंभीर प्रश्न
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आश्रम में 10 से 12 नाबालिग बच्चों को रखा गया था, जिसकी सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन एवं फायर सेफ्टी विभाग को दी गई थी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
बच्चों को लाने के समय अभिभावकों का शपथ पत्र न होना और बाद में बच्चों को घर भेजते समय शपथ पत्र बनवाना भी संदेह के घेरे में है। बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया गया या नहीं, इस पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पुलिस सत्यापन और सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा
हिंदू जागरण मंच का कहना है कि जब सामान्य किरायेदार के लिए पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, तो वर्षों से नाबालिग बच्चों को रखने वाले आश्रम की जानकारी पुलिस को न होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
अवैध प्रार्थना सभाओं पर भी सवाल
आरोप है कि प्रत्येक रविवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बिना अनुमति घरों में प्रार्थना सभाएं एवं चर्च संचालित किए जा रहे हैं। संगठनों ने प्रशासन से पूछा है कि क्या इन गतिविधियों की विधिवत अनुमति ली गई है, यदि नहीं तो कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
नार्को, पॉलिग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने डेविड चाको का नार्को, पॉलिग्राफ एवं ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की भी मांग की है, ताकि पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सके।
प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग
हिंदू जागरण मंच एवं स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गलत जानकारी के आधार पर जारी एन.ओ.सी. को निरस्त किया जाए, अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाए तथा सभी संबंधित विभागों से समन्वित जांच कर दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में हिंदू जागरण मंच जिला अध्यक्ष सुशील लढ्ढा ने स्पष्ट कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
*लाल टोपी राजू सोनी*
राजनांदगांव*
Devashish Govind Tokekar
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