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भारतीय संविधान (अनुच्छेद 14 एवम 15) द्वारा प्रदत्त एक मौलिक अधिकार है,

कानून के समक्ष सभी को समान मानता है। यह धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को रोकता है।
इस आधार से यदि सरकार UGC बिल में तीन बिंदु और जोड़ दे तो किसी को भी आपत्ति नहीं होगी ..
1. अगर शिकायत फर्जी पाया जाता है तो
उसके खिलाफ भी कार्यवाही हो ।
2. जांच के लिए जो टीम गठित होगी उसमें
ओबीसी और सामान्य वर्ग के भी सदस्य हो।
3. अगर सामान्य वर्ग के लोगों के साथ कोई
जातिसूचक और शोषण हो तो उसके लिए भी
सजा का प्रावधान हो ।
जाति के आधार पर लोगों को बांटना गलत है और इससे किसी का भला नहीं होगा।
यूजीसी बिना सोचे-समझे ऐसा फैसला क्यों लिया. कॉलेजों और संस्थानों में सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
अब शिक्षा जगत और राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

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