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सरकार बुढ़ापा पेंशन में आमदनी के फैसले को निरस्त करें: निर्मल सिंह



मानवाधिकार सरकार को हर 5000 की आबादी पर एक डिस्पेंसरी खोलने की हिदायत देता है ।

गांव बोहली, सिंहपुरा, सिठाना जैसे गांव डिस्पेंसरी की सुविधा से कोसों दूर


पानीपत, 28 जनवरी। बुढ़ापा पेंशन हर बुज़ुर्ग को मिलनी चाहिए। यह प्रत्येक बुज़ुर्ग का अधिकार है। सरकार का बुढ़ापा पेंशन को आमदनी के साथ जोड़ने का फैसला ग़लत है। सरकार जनविरोधी और बुज़ुर्ग-विरोधी सोच को उजागर करने का काम कर रही है। सरकार द्वारा बुढ़ापा पेंशन के मूल उद्देश्य को धीरे धीरे समाप्त करने का काम किया जा रहा है।


मानवाधिकारों के जानकार गांव बोहली निवासी स निर्मल सिंह विर्क का कहना है, कि प्रदेश में बुढ़ापा पेंशन की शुरुआत ताऊ देवीलाल ने आरंभ की थी। जिसका केवल एकमात्र आधार बुजुर्ग की उम्र से ही था। बुज़ुर्गावस्था अपने आप में सम्मान से जीवन जीने और सामाजिक सुरक्षा की हक़दार है। ज्यादातर बुजुर्ग बुढ़ापा पेंशन से ही अपनी खाने पीने की जरूरी वस्तुएं खरीदते हैं, और अपना पालन पोषण कर रहे हैं। आमदनी के आधार पर पेंशन को बंद करने से बुजुर्गों के हालात ख़राब हो जाएंगे।


सरकार फैमिली आईडी के नाम पर आंकड़ों की राजनीति कर रही है , जबकि ज़मीनी हकीकत से पूरी तरह अभिन्न है। असल में ग्रामीण आंचल में आकंड़े कुछ ओर ही बोलते। ग्रामीण इलाके में सुविधाओं का बिल्कुल टोटा है। आज भी ग्रामीण इलाकों में सरकार की ओर से कोई प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध नहीं। गांव बोहली, सिंहपुरा और सिठाना जैसे गांव डिस्पेंसरी की सुविधाओं से आज भी कोसों दूर हैं।

जबकि मानवाधिकार कहता है कि हर 5000 की आबादी पर सरकार को प्राथमिक चिकित्सालय खोलने चाहिए। चिकित्सालय खोलने में सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है। बुजुर्गों की पेंशन पर मनमाने फैसले थोप रही है। जिसमें 400 गज का प्लॉट, पुराना चार पहिया वाहन, खेती की फसल की बिक्री, ज़्यादा बिजली बिल या सरकारी राशन न लेना — इन आधारों पर किसी बुज़ुर्ग को अमीर मान लेना और उसकी पेंशन रोक देना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और ग़लत है।

विर्क ने कहा । कि बुढ़ापा पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों का सामाजिक अधिकार और सम्मान के लिए योजना है। इसमें आय, बिजली बिल और राशन जैसे पैमानों से जोड़ना बुज़ुर्गों के आत्मसम्मान को कुचलने जैसा है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि वृद्धावस्था पेंशन से आय संबंधी शर्त को हटाया जाए और पैंशन को बुजुर्गों के लिए यथावत रहने दिया जाए। तथा बुजुर्गों के कल्याण के लिए बुढ़ापा पेंशन में वृद्धि भी की जाएं।

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