
क्या अस्पताल की एमरजेंसी से लेकर वार्ड तक कोई डॉ ऑन कॉल नहीं रहते??
रहते हैं तो अपनी मनमानी करते हैं। इन ग़रीबों को कब तक ऐसे भटकना पड़ेगा??
*बाड़मेर: कुछ घंटे पहले की कहानी बाड़मेर जिला अस्पताल की!!*
एक अनपढ़ महिला 9 महीने के अपने बच्चे को गांव के CHC में दिखाने जाती है वहाँ से डॉ कहते हैं बाड़मेर जिला अस्पताल लेकर जाइए, बच्चे के गले में कुछ अटक गया था। महिला बाड़मेर जिला अस्पताल एमरजेंसी में लेकर आई, वहाँ से जवाब मिला मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केन्द्र में 2nd फ्लोर लेकर जाइए! महिला भागती हुई मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केन्द्र में आकर पर्ची कटवाती है और वहाँ पर किसी नर्सिंग स्टाफ को पूछकर 2nd फ्लोर किसी वार्ड में पहुँचती है,
*जवाब मिला SNCU वार्ड में जाइए….*
बच्चे को गोद में लिया हुआ जब SNCU पहुँचती है तो वहाँ जवाब मिलता है PICU जाइए। 3rd फ्लोर जल्दी वहाँ पहुँचते ही जवाब मिलता है आगे गली से होते हुए B वार्ड में जाइए। B वार्ड में बैठे नर्सिंग कर्मचारी जवाब देते हैं अपने जोश में — यहाँ किसने भेजा आपको, आप PICU जाइए! महिला की आँखों में आँसू और ऊपर से ये हालत अस्पताल के, देखिए आप।
*अभी तो कहाँ, कहानी अब शुरू होगी:*
महिला PICU में पहुँचती है तो वहाँ एक JR आते हैं, बोलते हैं यहाँ अभी कोई स्पेशल डॉ नहीं है, आपको हॉस्पिटल के पीछे डॉ साहब के क्वाटर में जाना होगा। कोई एक डॉ का नाम भी बताते है PICU मे बैठे JR.
महिला अनपढ़ है, उसका पति कमठे पर अपने गांव से दूर मजदूरी करने गया हुआ है।
*बड़ा सवाल:-*
क्या अस्पताल की एमरजेंसी से लेकर वार्ड तक कोई डॉ ऑन कॉल नहीं रहते??
रहते हैं तो अपनी मनमानी करते हैं। इन ग़रीबों को कब तक ऐसे भटकना पड़ेगा??