
UGC New Rules: किन नए नियमों पर मचा है बवाल? यहां दूर करें पूरा कन्फ्यूजन
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से कुछ नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के सामने आने के बाद देशभर में शिक्षकों, छात्रों और आम नागरिकों के बीच असंतोष देखने को मिल रहा है।
इन नियमों के विरोध में उत्तर प्रदेश सरकार में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। वहीं, मशहूर कवि कुमार विश्वास ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा—
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा।”
क्या हैं UGC के नए नियम?
UGC ने ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’
(Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) जारी किए हैं। इन नियमों के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं—
1. Equity Committees और Equity Squads का गठन
देश के हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads बनाई जाएंगी। आलोचकों का कहना है कि Equity Squads को अत्यधिक अधिकार दिए गए हैं, जबकि “भेदभाव” की स्पष्ट परिभाषा नियमों में ठीक से निर्धारित नहीं की गई है।
2. 24×7 हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था
हर संस्थान में Equal Opportunity Centre स्थापित किया जाएगा, जहां छात्र कभी भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। विरोध करने वालों का तर्क है कि बिना ठोस प्रमाण के दर्ज शिकायतें दूसरे छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
3. SC-ST और OBC वर्ग पर विशेष फोकस
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों को सुरक्षित और समान अवसर वाला वातावरण उपलब्ध कराना है। हालांकि, प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि इससे सवर्ण वर्ग के छात्रों को निशाना बनाया जा सकता है और सामाजिक विभाजन और बढ़ेगा।
4. नियमों का अनिवार्य पालन
UGC ने स्पष्ट किया है कि सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संस्थान की मान्यता रद्द की जा सकती है या वित्तीय सहायता रोकी जा सकती है। विरोध करने वालों के अनुसार इससे संस्थानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
UGC ने क्या कहा?
नियमों को लेकर हो रहे विरोध पर UGC ने सफाई देते हुए कहा है कि ये नियम समय की जरूरत हैं। पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़े वर्गों के खिलाफ भेदभाव से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। UGC का कहना है कि इन नए नियमों से समान अवसर सुनिश्चित होंगे और सभी वर्गों के छात्रों को सुरक्षित माहौल मिलेगा।