अस्तित्व संकट झेल रहे उतर कोयल परियोजना उच्च विद्यालय के लिए ग्रामीण हुए एकजुट,बनी समिति करेगी संघर्ष
मोहम्मदगंज।पलामू।झारखंड
अस्तित्व संकट झेल रहा पलामू जिला अंतर्गत मोहम्मदगंज प्रखंड क्षेत्र का प्रथम उच्च विद्यालय उतर कोयल परियोजना उच्च विद्यालय को बंद होने से बचाने के लिए प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण मुखर हो रहे हैं।26 जनवरी सोमवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन के बाद विद्यालय के लाभुक ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की एक बैठक हुई और बैठक में सर्वसम्मति से उतर कोयल परियोजना उच्च विद्यालय बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया।साथ ही तिरंगा झंडा के समक्ष विद्यालय को बंद होने से बचाने का शपथ लिया गया।गठित समिति में अशोक यादव को संरक्षक,अश्विनी कुमार सिंह को अध्यक्ष,गणेश प्रसाद,धीरेंद्र कुमार को उपाध्यक्ष, महेन्द्र प्रसाद सिंह को महासचिव, पचु रजवार,नगीना सिंह को सचिव,मिथलेश सिंह को कोषाध्यक्ष, नित्यानन्द पाठक को सह कोषाध्यक्ष, राकेश सिंह,कुंदन चौरसिया, शम्भू चौरसिया, रविशंकर सिंह,अनूप कुमार को मीडिया प्रभारी,रामदेव मेहता को कानूनी सलाहकार, विवेक विशाल को कार्यक्रम संयोजक,रविकांत कुमार ,आरुष राजपूत,रौशन मेहता को आई टी सेल,के अलावा उमेश राम,रामबचन बैठा ,सुमेश राम,अर्जुन यादव,जनेश्वर राम,सिद्धार्थ कुमार,विनोद पासवान,रौशन कुमार ,गुड्डू मेहता,संतोष कुमार,जितेंद्र चौरसिया,अमरकांतशर्मा,विक्की,सनी,शिवम,दीपक,योगेंद्र,ओम शंकर,रविकांत को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विद्यालय को शिक्षा विभाग में अधिग्रहण करने की मांग को लेकर प्रखंड स्तर,अनुमंडल स्तर,जिला स्तर के बाद राज्य स्तर के अधिकारियों को शिष्टमंडल द्वारा क्रमशः ज्ञापन दिया जाएगा,साथ ही बिहार और झारखंड राज्य के सिचाई विभाग के अधिकारियों को भी विद्यालय के अस्तित्व संकट से अवगत कराया जाएगा।इसके अलावा शिष्टमंडल क्षेत्रीय विधायक, सांसद उसके बाद राज्य के शिक्षा मंत्री,मुख्यमंत्री से मिलकर विद्यालय को बचाने के लिए ज्ञापन देकर निवेदन करेगा। मालूम हो कि वर्तमान में गंभीर संकट से गुजर रहा है और बंद होने के कगार पर है।यह विद्यालय वर्ष 1985 में उतर कोयल सिंचाई परियोजना परिसर में सिंचाई कर्मियों एवं स्थानीय ग्रामीण बच्चों की शिक्षा हेतु स्थापित किया गया था तथा वर्ष 1986 में उपशिक्षा निदेशक, बिहार सरकार द्वारा स्थापना की अनुमति प्रदान की गई थी। विद्यालय का संचालन जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार द्वारा किया जाता रहा।बिहार–झारखंड राज्य विभाजन के पश्चात अन्य परियोजना विद्यालयों (इंद्रपुरी, तेनुघाट, कोसी, बीरपुर, बाल्मीकिनगर आदि) को संबंधित राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया, किंतु उतर कोयल परियोजना विद्यालय आज तक शिक्षा विभाग में अधिग्रहित नहीं हो सका है।वर्तमान में विद्यालय में मात्र एक शिक्षक (प्रधानाध्यापक प्रभार) कार्यरत हैं, जो वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसके पश्चात विद्यालय का संचालन पूर्णतः असंभव हो जाएगा। विद्यालय द्वारा वर्ष 2011 से लगातार शिक्षा विभाग में अधिग्रहण हेतु पत्राचार किया जाता रहा है, परंतु अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।पूर्व में विद्यालय शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत उत्कृष्ट रहा है, जहाँ:9 शिक्षक, 2 चतुर्थवर्गीय कर्मी एवं 1 रात्रि प्रहरी कार्यरत थेकक्षा 7 से 10 तक की पढ़ाई होती थी
मैट्रिक परीक्षा में परिणाम उत्कृष्ट रहे12 किमी के दायरे में कोई अन्य उच्च विद्यालय उपलब्ध नहीं थापलामू एवं गढ़वा जिले के कई प्रखंडों से छात्र-छात्राएँ अध्ययन करते थे
विद्यालय के पास आज भी स्वयं का भवन, चहारदीवारी, खेल मैदान, शौचालय, पेयजल एवं अन्य आधारभूत संरचनाएँ उपलब्ध हैं। विद्यालय के बंद होने की स्थिति में सरकारी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा, चोरी एवं बर्बादी की प्रबल आशंका है।
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