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इंदौर में ज्योतिष महाकुंभ: पं. संदीप शास्त्री 'ज्योतिष रत्न' से अलंकृत, नक्षत्रों की चाल को बताया 'सैटेलाइट' जैसा विज्ञान

इंदौर। मध्य प्रदेश शहर के आध्यात्मिक गलियारों में उस वक्त गौरवमयी क्षण अंकित हो गया, जब 'श्री दुर्गा ज्योतिष व रत्न अनुसंधान' के तत्वावधान में आयोजित भव्य ज्योतिष सम्मेलन में पं. संदीप शास्त्री को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 'ज्योतिष रत्न' की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
देश-विदेश के दिग्गजों की उपस्थिति में हुए इस आयोजन ने न केवल ज्योतिषीय गणनाओं पर चर्चा की, बल्कि इसे आधुनिक विज्ञान और सामाजिक सरोकार से जोड़ने का नया मार्ग भी प्रशस्त किया।
तकनीक और अध्यात्म का संगम: पं. शास्त्री का संबोधन
सम्मान स्वीकार करते हुए पं. संदीप शास्त्री ने ज्योतिष को एक 'कॉस्मिक साइंस' के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने एक बेहद प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा:
> "अगर अंतरिक्ष में घूमता एक छोटा सा सैटेलाइट हमारे फोन और टीवी को कंट्रोल कर सकता है, तो ब्रह्मांड के विशाल ग्रह-नक्षत्र हमारे जीवन को प्रभावित क्यों नहीं कर सकते? ज्योतिष अंधविश्वास नहीं, बल्कि गणनाओं का वह विज्ञान है जो समाज को सही दिशा दिखाने का सामर्थ्य रखता है।"
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ज्योतिष का नया चेहरा: सिर्फ भविष्यफल नहीं, समाज सुधार भी
पं. शास्त्री ने सम्मेलन में उपस्थित विद्वानों के समक्ष एक विजन रखा, जिसमें उन्होंने ज्योतिष को 'प्रकृति और पॉकेट' दोनों के अनुकूल बनाने की अपील की:
* किफायती समाधान: उन्होंने कर्मकांड को आडंबर से दूर ले जाकर सरल और कम खर्चीले उपायों पर जोर दिया।
* इको-फ्रेंडली ज्योतिष: उपायों के जरिए जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश देने का आह्वान किया।
* पारिवारिक समरसता: ज्योतिष का मुख्य ध्येय टूटते परिवारों को जोड़ना और रिश्तों में मधुरता लाना बताया।
आयोजन की गरिमा
इस सम्मेलन का सफल संचालन संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. हरीओम जोशी एवं सचिव श्री प्रकाश जी गौड़ के नेतृत्व में हुआ। कार्यक्रम में जुटे विद्वानों ने अपने नवीनतम शोध प्रस्तुत किए, जिससे ज्योतिष के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार हुआ।

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