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भैरव कथा के प्रथम दिवस जगद्गुरु वसंत विजयानंद महाराज ने बताई मां की महिमा, कथा श्रवण करने उमड़ीं श्रद्धालुओं की भीड़।

भैरव कथा के प्रथम दिवस जगद्गुरू वसंत विजयानंद महाराज ने बताई मां की महिमा, कथा श्रवण करने उमडी श्रद्धालुओं की भीड़

पाली पाली शहर के अणुव्रत नगर के विशाल प्रांगण में सजी आध्यात्मिक नगरी में जगद्गुरू वसंत विजयानन्द गिरी महाराज के श्रीमुख से भैरव कथा का रसास्वादन करने भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है । आध्यात्मिक महोत्सव के प्रथम दिन शनिवार को प्रातः बड़ी संख्या में आए साधकों को कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू ने मंत्रों के उच्चारण के साथ उसके अर्थ और उपयोग के बारे में समझाया तथा साधना करने की विधियां बताई गई। पश्चात कष्ट निवारण श्री महालक्ष्मी यज्ञ में आहुतियां दी गई। करीब ढाई घंटे तक चले यज्ञ विधि विधान से संपन्न कराए गए।

रात्रि में भैरव कथा में जगद्गुरूदेव के प्रवचन सुनने भक्तों की भारी भीड़ जुटी। गुरूदेव ने प्रथम दिवस कथा में कहा कि भैरव देव सर्वशक्तिमान हैं। वे संसार की रक्षा के देव हैं। भैरव का अर्थ ही भय रहित है। कथा का आरंभ करते हुए आपने पौराणिक प्रसंग में बताया कि जब मां पार्वती को नारद ऋषि ने प्रसन्न होकर फल दिया और कहा कि इसे पूरा खाने वाला संसार में प्रथम पूजनीय होगा। मां पार्वती ने स्नेहवश अपने पुत्र गणेश और कार्तिकेय को बुलाया। दोनों से कहा जो संसार का सबसे पहले परिक्रमा लगा कर आए उसे यह फल खाने को मिलेगा। कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर आरूढ़ होकर रवाना हो गए लेकिन गणेश वहीं रहे। बाल गणेश ने मां से कहा कि आप ही कहते हैं माता पिता ही संसार हैं? मां पार्वती ने सहमति दी। भगवान गणेश ने तुरंत अपनी मां की दो बार परिक्रमा की और सम्मुख खड़े हो गए। मां पार्वती अनुत्तरित खड़ी रह गई। उनके हाथ से फल सीधे गणेश की झोली में गिरा। तब से भगवान गणेश प्रथम पूज्यनीय हुए। कथा के मध्य गुरूदेव ने मधुर भजन सुनाकर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कथा के मध्य दिव्य चमत्कारों का अनुभव भी श्रद्धालुओं को कराया गया।

मन मोह रही मनोहारी झांकियां–
आध्यात्मिक महोत्सव प्रांगण में पौराणिक काल के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाती सुंदरतम जिसमें भगवान राम, योगेश्वर कृष्ण, महावीर स्वामी आदि के जीवन से सम्बंधित जीवंत झांकियां श्रद्धालुओं का मन मोह रही है। इन झांकियों के माध्यम से पौराणिक देवी देवताओं के चरित्रों को बखूबी प्रस्तुत किया गया है।

रिपोर्ट - घेवरचन्द आर्य पाली

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