बिल्सी: सद्गुणों का संग ही सत्संग है :आचार्य संजीव रूप
बिल्सी | यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया ! आज के सत्संग में अथर्ववेद के मंत्रों से आहुतियां देते हुए आचार्य संजीव रूप ने कहा "सत्संग का अर्थ है सद्गुणों का संग , सत्य का संग ! अच्छे प्रकार से ज्ञानपूर्वक कर्म करना और फिर सुख शांति आनंद को पाना ही सत्संग है ! केवल गीत गा लेना ढोल मंजीरा बजाना या फिर कुछ धार्मिक अनुष्ठान कर लेना सत्संग नहीं है ! जी व्यवहार से जिस कर्म से हमारा जीवन पवित्र हो वही कर्म वही व्यवहार वही ज्ञान सत्संग है ।
आचार्य तृप्ति आर्य ने सुंदर भजन गया "आनंद सोत बह रहा पर तू उदास है , अचरज है जल में रहकर भी मछली को प्यास है - फूलों में जो सुभाष ईख में मिठास है भगवान का त्यों विश्व के कण-कण में वास है । आनंद मोक्ष का नापा सकेगा तब तलक तो जब तलक प्रकाश इंद्रियों का दास है ! सत्संग में राकेश आर्य पंजाब सिंह विचित्रपाल सिंह श्रीमती संतोष कुमारी श्रीमती सूरजवती देवी, श्रीमती सरोज देवी , श्रीमती कमलेश देवी , कौशिकी आर्य , तान्या आर्य आदि मौजूद रहे !