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वन्यजीव हमले की दर्दनाक कीमत: चार साल की मासूम की गई जान

जयरीखाल ब्लॉक के बरसवार गाँव से एक और अधिक पीड़ादायक खबर सामने आई है। बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल हुई चार वर्षीय मासूम बच्ची ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गाँव सहित आसपास के क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री वीरेन्द्र आर्य की भतीजी पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। घटना के तुरंत बाद परिजनों व ग्रामीणों की मदद से बच्ची को कैंट हॉस्पिटल, लैंसडौन में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के चलते इलाज के दौरान ही उसकी मृत्यु हो गई।

मासूम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक हँसता-खेलता जीवन यूँ असमय काल के गाल में समा जाना पूरे समाज को झकझोर देने वाला है। यह घटना क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह तस्वीर को उजागर करती है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघ की सक्रियता देखी जा रही थी, जिसकी सूचना कई बार वन विभाग को दी गई, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब मासूम की जान जाने के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और वे स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन व वन विभाग से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा, हरसंभव सहायता और न्याय दिलाया जाए। साथ ही क्षेत्र में बाघ की निगरानी, गश्त बढ़ाने, पिंजरे लगाने और स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्ययोजना शीघ्र लागू की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े।

इस दुखद घटना पर पूरे क्षेत्र में शोक व्यक्त किया जा रहा है। लोग ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि दिवंगत मासूम की आत्मा को शांति मिले और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्राप्त हो।

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