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राष्ट्रीय शिक्षा सेक्टर में बड़ा बदलाव: यूजीसी लागू करता है ‘समानता नियम

नई दिल्ली, 24 जनवरी 2026 – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 नामक नए नियम लागू कर दिए हैं, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव (caste discrimination) रोकने और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए हैं। �
Vajiram and Ravi
ये नियम 15 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुके हैं और सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों तथा हैरिंग एजुकेशन संस्थानों पर लागू होंगे। उनका उद्देश्य है कि एससी, एसटी, ओबीसी समेत सभी समुदायों को सुरक्षित और समावेशी माहौल मिले। �
Amar Ujala
📌 नए नियमों की मुख्य बातें:
✔️ हर संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC) और Equity Committee गठित करना अनिवार्य होगा। �
✔️ इन समितियों में SC/ST/OBC, महिला, दिव्यांग और अन्य प्रतिनिधि शामिल होंगे। �
✔️ इन प्रावधानों के तहत जाति‑आधारित भेदभाव के शिकायत निवारण तंत्र, 24×7 हेल्पलाइन, तथा ग्रामीण शिकायत प्रणाली लागू होगी। �
✔️ नियमों के पालन में विफल रहने पर संस्थान की मान्यता रद्द, डिग्री चलाने से रोका जाना, तथा UGC योजनाओं से बाहर किया जाना जैसी सख्त कार्रवाइयाँ सम्भव हैं। �
Vajiram and Ravi
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@mathrubhumi
💬 सरकार का दावा:
शिक्षा मंत्रालय और UGC अधिकारियों का कहना है कि यह पहल भेदभावपूर्ण व्यवहार खत्म करने, सुरक्षित परिसर तैयार करने, तथा समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। �
Amar Ujala
UGC का कहना है कि शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, विकलांगता आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा और सभी हितधारकों के अधिकार सुरक्षित होंगे। �
Organiser
⚠️ संघर्ष और आलोचना:
हालाँकि, नए नियमों का विरोध भी जोर पकड़ गया है।
📍 सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों और संगठनों ने आरोप लगाया है कि नियमों के कुछ प्रावधान मनमाना और एक‑तरफा हैं और इससे सामान्य वर्ग को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। �
📍 विशेषकर नियम 3(C) पर आपत्ति जताई जा रही है — आरोप है कि यह नियम सामान्य वर्ग को दोषी मानकर भेदभाव करेगा और कुछ मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें संवैधानिक वैधता की समीक्षा की मांग की गई है। �
AajTak
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📊 छात्रों और सामाजिक समूहों की प्रतिक्रिया:
🔹 कुछ छात्र समुदायों का कहना है कि नियमों में झूठी शिकायतों के खिलाफ दंड का प्रावधान नहीं है, जिससे इसका दुरुपयोग होने का डर है। �
🔹 कई समूहों ने दावा किया है कि Equity Committee और Equity Centres एक तरफ़ा निष्पक्षता के बजाय भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। �
🔹 विरोध समान्य वर्ग के नेताओं, छात्र संगठनों तथा वकीलों के समर्थन से बढ़ रहा है और सोशल मीडिया तथा कॉलेज परिसरों में भी बहस जारी है। �
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🔎 विशेष रिपोर्ट:
सरकार के तर्क के विपरीत, कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि निगरानी, डेटा संकलन तथा शिकायत निवारण की प्रक्रिया अत्यधिक ब्यूरोक्रेटिक है और इससे संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। �
@mathrubhumi
📌 निष्कर्ष:
देशभर में लागू UGC के नए समानता नियम 2026 का उद्देश्य उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव को कम करना है, लेकिन इसकी व्यापक आलोचना भी सामने आई है। वहीँ अदालत में चुनौती और विरोध के बीच यह मुद्दा अब शैक्षणिक नीतियों, संवैधानिक अधिकारों और समाज में समानता की सीमा जैसे सवालों को जन्म दे रहा है।

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