
बसंत पंचमी का पावन पर्व: दयालबाग और अन्य ब्रांचों में भक्ति और उल्लास का माहौल ::स्वतंत्रता
सराहा 24 जनवरी
बसंत पंचमी के अवसर पर दयालबाग और देश के विभिन्न ब्रांचों में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल देखने को मिला।जानकारी देते हुए ब्रांच सेक्रेटरी सराहा ब्रांच स्वतंत्रता गौतम ने यहाँ प्रेस को दी एक विज्ञप्ति में बताया कि दयालबाग क्षेत्र, जो राधा स्वामी मत का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है, इस पावन पर्व पर सुंदर सजावट और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था से जगमगा उठा। पूरे क्षेत्र में भक्ति और आनंद का संचार हुआ, जिसने सतगुरु भक्ति, निष्काम सेवा और आत्मिक अनुशासन की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।उन्होंने बताया कि सराहाँ ब्रांच, जो इन ब्रांचों में से एक है, में भी बसंत पंचमी का उत्सव अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। ब्रांच के सत्संगी एकत्र हुए, सतगुरु की पावन वाणी का श्रवण किया और बसंत ऋतु के आध्यात्मिक एवं आत्मिक महत्व पर विचार विमर्श किया।बसंत पंचमी नवचेतना, प्रेम और उमंग का प्रतीक मानी जाती है। शीत ऋतु के बाद बसंत के आगमन से प्रकृति में नयी ताजगी का संचार हुआ और मानव जीवन में आशा और सकारात्मकता का उदय हुआ। इसी भावना के अनुरूप सराहाँ ब्रांच में विशेष सत्संग आयोजित किया गया, जिसमें सत्संगी सामूहिक रूप से सत्संग, प्रार्थना और ध्यान में भाग लिए।सत्संग के दौरान बसंत से संबंधित पावन साखियों का भावपूर्ण पाठ किया गया, जैसे—
“आज आई बहार बसंत,
उमंग मन गुरु चरणन लिपटाय।”
“घट में खेलूँ अब बसंत,
भेद बताया सतगुरु संत।”
साखियों के माध्यम से सत्संगी ने सतगुरु की महिमा, आत्मिक आनंद और साधना का अनुभव किया। उपस्थित सभी सत्संगी ने गुरु चरणों में नमन करते हुए आत्मिक शांति और आध्यात्मिक रस का अनुभव किया।इस प्रकार, दयालबाग और देश भर के विभिन्न ब्रांचों में बसंत पंचमी का यह आयोजन सत्संगी में श्रद्धा, प्रेम, भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत रहा। सराहाँ ब्रांच इसका महत्वपूर्ण हिस्सा रही और यह पर्व सत्संगी के लिए आत्मिक उत्थान, अनुशासन, आध्यात्मिक प्रेरणा और सेवा का स्रोत बना।