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जिस पंजाब केसरी को इंदिरा नहीं झुका पाई चार दिन पहले जन्मी भगवंत सरकार क्या झुकाएगी : अनिल विज

*पंजाब सरकार की पंजाब केसरी के खिलाफ अनुचित कार्रवाई किसी तरह भी बर्दाश्त ए काबिल नहीं : कौशल*

*एमडब्ल्यूबी ने सार्वजनिक मंच से पंजाब सरकार के खिलाफ पारित किया निंदा प्रस्ताव*

*जल्द राज्यपाल को पंजाब सरकार की अनुचित कार्रवाई के विरुद्ध ज्ञापन देगी एमडब्ल्यूबी : धरणी*

चंडीगढ़*अम्बाला* 24.01.2026 आरके शर्मा हरीश शर्मा अश्वनी शर्मा अनिल शारदा प्रस्तुति---मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश भर के कोने-कोने से आए पत्रकारों में जहां पंजाब केसरी संस्थान के कार्यालय पर पंजाब की भगवंत मान सरकार द्वारा की गई अनुचित करवाई को लेकर काफी रोष था, वहीं मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन द्वारा एक सार्वजनिक निंदा प्रस्ताव पंजाब सरकार के खिलाफ भी लाया गया और जल्द पंजाब के राज्यपाल को इस बारे ज्ञापन देने की भी घोषणा की गई। इस बारे सार्वजनिक मंच से इसकी तुलना इमरजेंसी के समय से की गई।

पंजाब सरकार की यह अनुचित कार्रवाई किसी तरह भी बर्दाश्त ए काबिल नहीं : कौशल

ऐसे समय में हम और पंजाब केसरी अलग अलग नहीं: कौशल



उन्होंने कहा कि बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के लिए लड़ाई लड़ी, साथ में पत्रकारता भी की। सर छोटू राम जो किसानों के मसीहा रहे हैं, वह हिंदुस्तान अखबार के एक बड़े पत्रकार थे। इस मौके पर उन्होंने पंजाब सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार चाहे केंद्र की हो या राज्य की, इतनी संवेदनशील नहीं होना चाहिए कि छोटी सी नेगेटिव खबर लगे तो सरकारी विज्ञापन रोक दिए जाएं या किसी प्रकार के अंकुश लगा दिया जाए, पुराने दौर में जब कार्टूनिस्ट कार्टून बनाते थे वह बेशक नेताओं के खिलाफ होते थे लेकिन जवाहरलाल नेहरू उन कार्टूनिस्टों को बुलाकर उन्हें सम्मान देते थे। आज भी सरकारों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा पत्रकारों के लिए पेंशन लगाने के बाद कई प्रदेशों की मजबूरी हुई और उन्होंने पेंशन लगी। ऐसे कार्यों में चंद्रशेखर धरनी जैसे लोग अपना घर फूंककर तमाशा देखते हैं यानी पत्रकारों के लिए हमेशा अगाड़ी में खड़े होकर उनके सम्मान और हितों के लड़ाई लड़ते हैं। निष्पक्ष काम करते हैं। समाज के भले के लिए काम करते हैं। इसी तरह सरकारों को भी अपना दायित्व निभाना चाहिए। उन्होंने पंजाब में हुए पंजाब केसरी संस्थान पर की गई अनुचित कार्यवाही की भरसक निंदा करते हुए चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि बेशक सभी अखबारों का नजरिया सोच और कार्य करने का स्टाइल अलग-अलग हो लेकिन ऐसे मौके पर हम एक दूसरे से भिन्न नहीं है हम सभी एक हैं पंजाब में हुई इस गलत कारवाही में हम सभी एक हैं और यह किसी भी तरह से बर्दास्त नहीं किया जा सकता।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दैनिक ट्रिब्यून के संपादक नरेश कौशल ने मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन के प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां पहुंचे सभी पत्रकारबंधु बेहद सौभाग्यशाली हैं जो ऐसे मंच के साथ जुड़े हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी में इस प्रकार से कोई संगठन या संस्था चलाना अपने प्रोफेशनल और पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए, कई आर्थिक दिक्कतों का सामना करते हुए जो व्यक्ति जो संस्थान आप सभी को संगठित कर रहा है, आप सभी को जोड़कर आगे बढ़ा रहा है, यह बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। जिस प्रकार से संस्था यंगस्टरस को नई टेक्नोलॉजी के लिए तैयार करने की सोच रखती है यह अपने आपने बेहद अच्छी सोच का उदाहरण है। उन्होंने मुख्य अतिथि अनिल विज को एक शानदार पत्रकार बताते हुए कहा कि अगर अनिल विज मंत्री ना होते तो कई बार अख़बारों के पेज भी खाली रह जाते। उन्होंने अनिल विज को बब्बर शेर बताते हुए उन्हें कई गुणों से भरपूर बताया तथा कहा यारों के यार अनिल विज दिल से बात करते हैं और पत्रकारों के साथ हमेशा खड़े रहते हैं। वह तन मन धन की भावनाओं से हमेशा पत्रकारों से जुड़े रहते हैं।





जिस पंजाब केसरी को इंदिरा नहीं झुका पाई चार दिन से आई भगवंत सरकार क्या झुकाएगी : अनिल विज

भगवंत जैसी सरकारे बहुत समय तक नहीं रहती : अनिल विज

जान की बाजी लगाकर भी हमेशा पत्रकारों के साथ खड़ा रहूंगा : अनिल विज

मिलकर व डटकर लोकतंत्र की लाज बचाने के लिए मुकाबला करने की जरूरत : अनिल विज


इस मौके पर मुख्य अतिथि ऊर्जा, परिवहन व श्रम मंत्री अनिल विज ने मंच पर संबोधन के दौरान विश्व विख्यात जादूगर शंकर सम्राट से कहा कि आप अपने जादूगर से बड़ी-बड़ी चीजों को गायब कर देते हैं, हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि इस देश के भ्रष्ट नेताओं को आप गायब कर दो तो एक दिन में हमारा देश सोने की चिड़िया बन जाएगा। उन्होंने संस्था को इस भव्य, दूरदर्शी, अत्यंत सार्थक आयोजन के लिए बधाई दी तथा कहा कि यहां उपस्थित होकर गर्व की अनुभूति हो रही है। यह मंच केवल सम्मान समारोह नहीं बल्कि पत्रकारिता के संघर्ष, गरिमा और भविष्य को लेकर गहन चिंतन है। उन्होंने पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि तीन टांगों पर हर चीज लंगड़ा कर गिर जाएगी। अनिल विज ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान सरकार अपने कर्तव्य धर्म से भटक गई थी, मैंने खुद दफ्तर में देखा जब शाम को दरोगा आकर चिपकाई हुई खबरों को डंडे से मार कर कहता था कि यह उतार दो तो अखबारों ने अपने धर्म का निर्वहन किया और उन खबरों का स्पेस खाली छोड़कर खबरें छापी। यह लोगों के लिए एक मोन संदेश था और लोगों ने इसे खूब समझा कि सरकार ने जो खबर सच्चाई बताना चाहती थी उसे नहीं लगने दिया। इस इमरजेंसी का शॉप इंदिरा व उसकी पार्टी को ले बैठा। अब जहां-जहां चुनाव हो रहे हैं, धीरे-धीरे पार्टी खत्म हो रही है और 4 दिन से आई भगवंत मान सरकार जिसकी अभी जड़ें भी नहीं लगी, वह अखबारों से छेड़छाड़ कर रही है और वह पंजाब केसरी जिसे इंदिरा जैसी प्रधानमंत्री नहीं झुका पाई उसे कुछ दिनों पहले बनी भगवंत मान सरकार क्या झुकाएगी। आज भगवंत मान जायजती कर रहा है, मैं कहता हूं कि उस सरकार का पता भी नहीं चलेगा। यह मत मानो कि केवल पंजाब केसरी अखबार के साथ हुआ है, कल आप सभी के साथ ऐसा ही होगा, अगर आज मिलकर व डटकर लोकतंत्र की लाज को बचाने के लिए मुकाबला नहीं किया। अगर लोकतंत्र का एक स्तंभ कमजोर हो गया तो लोकतंत्र लंगड़ा कर गिर जाएगा। आज अगर पत्रकारिता पर सरकार हावी होती है तो आगे सरकार बताएगी कि क्या छपना है। ऐसे में सच्चाई सामने नहीं आएगी केवल एक पक्ष ही सामने आएगा। प्रेस की स्वतंत्रता पर पंजाब में प्रहार हो रहा है। इसकी निंदा सारे देश को करनी चाहिए ताकि दोबारा कोई सरकार किसी मीडिया हाउस पर ऐसा करने की सोच भी ना सके। लोकतंत्र के तीनों स्तंभ जब अपने अपने काम कर रहे हैं तो मीडिया पर दबाव आखिर क्यों? इन्हें भी निष्पक्षता से अपना काम करने देना चाहिए, नहीं तो ऐसी सरकारों का कुछ भी नहीं बचेगा। उन्हें कहा कि अनिल विज हूं और विज ने आज तक जो भी कुछ कहा है वह हुआ है। पत्रकारिता समाज का दर्पण है, यह सरकार और जनता के बीच में एक पुल है जो दोनों को जोड़े हुए हैं। जनता की बात, जनता की परेशानी सरकार तक पहुंचाता है और सरकार की करतूतें जनता तक। अगर कोई खबर सरकार के खिलाफ व जनता के हित में लगी भी है तो उसे अपनी आलोचना नहीं बल्कि मार्गदर्शन मनाना चाहिए। पत्रकारों का सरकार को आभारी होना चाहिए कि आपकी वजह से हमारे तक यह बात पहुंची है अनिल विज ने कहा कि पत्रकार की वजह से कई सरकार बनी भी हैं और गिरी भी हैं। पत्रकारिता का लोकतंत्र में एक मजबूत स्थान है। आप इस देश के लिए बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। यह आपका धर्म है और हमारे शहीदों ने सर कटवा दिए लेकिन धर्म नहीं छोड़ा और धर्म छोड़ने भी नहीं चाहिए। सरकारों को पत्रकारों की तकलीफों और दिक्कतों की ओर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब में सरकार ने अधर्म किया है, जिसका भुगतान इन्हें झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पत्रकारों के लिए 15000 रूपये मासिक पेंशन बसों में 4000 किलोमीटर की यात्रा निशुल्क इत्यादि कई सहूलियते देने का काम किया है और संस्था के अध्यक्ष माननीय चंद्रशेखर धरनी जी ने जो मेरे विभाग से संबंधित तीन डिमांड पत्रकारों के हितों के लिए की है मैंने तुरंत प्रभाव से अपने अधिकारियों को दफ्तर में बुलाकर मीटिंग के आदेश दे दिए हैं। मैंने तुरंत कार्यवाही शुरू कर दी है। अनिल विज ने कहा कि मैं जान की बाजी लगाकर भी हमेशा पत्रकारों के साथ खड़ा रहा हूं, खड़ा रहूंगा। यह मेरा धर्म है और मैं आप सबके साथ खड़ा रहूंगा। उन्होंने इस मौके पर कहा कि मेरी बहुत बड़ी हैसियत नहीं कि मैं आपके लिए ज्यादा मदद कर सकूं लेकिन मैं मीडिया वेलबीइंग एसोसिएशन को 31 लाख रुपए की राशि अपने बजट में से देता हूं। उन्होंने संस्था से कहा कि जिस प्रकार से सभी विभागों में ट्रेनिंग कार्यक्रम करवाए जाते हैं, आप भी जो आज की नई टेक्नोलॉजी के ज्ञाता और जानकार हैं उनके द्वारा पत्रकारों को ट्रेनिंग दिलवाएं ताकि पत्रकारिता एक मजबूत स्तंभ बन सके ताकि उनके कर्तव्यों के निर्वहन से इन्हें कोई रोक ना सके। जिस पर तुरंत प्रभाव से संस्था के अध्यक्ष चंद्रशेखर धरनी तथा महासचिव सुरेंद्र मेहता ने इस बात को स्वीकारते हुए घोषणा की कि बहुत शॉर्ट पीरियड के अंदर ट्रेनर के रूप में विशेषज्ञ को बुलाकर इस प्रकार के ट्रेनिंग कैंप हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में शुरू कर दिए जाएंगे।

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