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धार्मिक आस्था और मानव सेवा का अनुपम संगम बना डिंडोरी

डिंडोरी -- धार्मिक आस्था जब मानव सेवा से जुड़ती है, तब उसका स्वरूप और भी पावन हो जाता है। इन दिनों डिंडोरी जिले में ऐसा ही एक प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिल रहा है, जहाँ कुछ समर्पित समाजसेवियों ने नर्मदा परिक्रमा पर निकले श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन निःशुल्क भोजन की व्यवस्था शुरू की है।
नर्मदा परिक्रमा के मार्ग पर सुबह-सुबह समाजसेवी स्वयं अपने हाथों से पुलाव तैयार करते हैं और राह चलते परिक्रमा वासियों को प्रेम, श्रद्धा और आत्मीयता के साथ भोजन कराते हैं। इस सेवा में न कोई भेदभाव है और न ही किसी प्रकार की अपेक्षा—बस “नर्मदे हर” के जयघोष के साथ भूखे यात्रियों की सेवा की जा रही है।
परिक्रमा वासी बताते हैं कि लंबी यात्रा के दौरान जब कहीं से निःस्वार्थ भाव से भोजन मिलता है, तो तन के साथ-साथ मन को भी अपार शांति मिलती है। समाजसेवि हरिहर पाराशर और रवि मिश्रा का कहना है कि मां नर्मदा की कृपा से उन्हें यह अवसर मिला है और आगे भी यह सेवा निरंतर जारी रहेगी।

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