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मोबाइल नेटवर्क की बदहाली पर जनता में आक्रोश, TRAI की चुप्पी सवालों के घेरे में

मोबाइल नेटवर्क की बदहाली पर जनता में आक्रोश, TRAI की चुप्पी सवालों के घेरे में
नई दिल्ली / राज्य प्रतिनिधि:
देश में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति लगातार बद से बदतर होती जा रही है। 4G नेटवर्क आज भी देश के अधिकांश क्षेत्रों में सही ढंग से काम नहीं कर पा रहा है, जबकि 5G के नाम पर बड़े-बड़े दावे और प्रचार किए जा रहे हैं। हकीकत यह है कि घर के अंदर मोबाइल से बात करना मुश्किल हो गया है और इंटरनेट सेवा का हाल यह है कि स्क्रीन पर केवल “लोडिंग” का चक्र घूमता रहता है।
आम जनता का आरोप है कि टेलीकॉम कंपनियां घटिया सेवाएं देने के बावजूद मोबाइल रिचार्ज की दरों में लगातार और मनमानी बढ़ोतरी कर रही हैं। किसी भी कंपनी का नेटवर्क भरोसेमंद नहीं है, फिर भी उपभोक्ताओं से पूरी कीमत वसूली जा रही है। यह सीधे तौर पर जनता की मेहनत की कमाई के साथ धोखाधड़ी है।
सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) जैसी जिम्मेदार नियामक संस्था इस पूरे मामले में पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है। न तो नेटवर्क गुणवत्ता पर सख्त कार्रवाई दिखाई दे रही है और न ही रिचार्ज दरों पर कोई प्रभावी नियंत्रण। इससे यह सवाल उठता है कि क्या TRAI केवल कागज़ों तक सीमित होकर रह गई है?
जनता के बीच यह धारणा भी मजबूत हो रही है कि सरकारें चुनाव के समय टेलीकॉम कंपनियों से मिलने वाले पार्टी फंड के सामने आम नागरिक की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही हैं। सेवा खराब, कीमतें ऊंची और जवाबदेही शून्य, यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।
जनता की ओर से मांग की जा रही है कि
मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता में तत्काल और ठोस सुधार किया जाए,
रिचार्ज दरों में की गई अनुचित बढ़ोतरी पर तुरंत रोक लगाई जाए,
या फिर टेलीकॉम कंपनियों को मजबूत, स्थिर और भरोसेमंद नेटवर्क उपलब्ध कराने के लिए बाध्य किया जाए।
यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो बढ़ते जनआक्रोश की पूरी जिम्मेदारी TRAI और केंद्र सरकार की मानी जाएगी।

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