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राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्टर ने दिए आवश्यक निर्देश

राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्टर ने दिए आवश्यक निर्देश

कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न

राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार, मुरैना में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जलवायु परिवर्तन के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों तथा विभिन्न विभागों की भूमिका एवं उत्तरदायित्वों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कमलेश कुमार भार्गव, अपर कलेक्टर श्री अश्विनी कुमार रावत, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पदमेश उपाध्याय सहित समस्त जिला अधिकारी, जिला सर्विलेंस अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट तथा कृषि, वन, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, परिवहन, पशुपालन, भू-विज्ञान, शिक्षा, रोजगार निर्माण, ऊर्जा, वित्त, पंचायत राज एवं विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जिले के लिए जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम की समग्र कार्ययोजना तैयार करने तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अंतर्गत जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होने वाली बीमारियों एवं संवेदनशील जनसंख्या की पहचान, संबंधित रोगों के आंकड़ों का संधारण एवं समय-समय पर अद्यतन, विकासखंड स्तर एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं के आयोजन जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
विशेष रूप से वायु प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों एवं उनसे बचाव पर गहन चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार वायु प्रदूषण हाल के वर्षों में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है। वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से पुरानी बीमारियों में वृद्धि, समयपूर्व मृत्यु तथा प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभाव देखे जा रहे हैं। इसके दुष्प्रभाव विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, यातायात पुलिस कर्मियों तथा नगर निगम/नगर पालिका कर्मचारियों में अधिक पाए जाते हैं।
इन चुनौतियों के दृष्टिगत जिला चिकित्सालय, मुरैना में ए.आर.आई. (Acute Respiratory Infection) एवं चेस्ट क्लिनिक का संचालन प्रारंभ किया गया है। साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा वायु गुणवत्ता की स्थिति को सरलता से समझाने एवं जन-जागरूकता हेतु एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लागू किया गया है, जिसे छह रंगों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की क्षमता-वृद्धि (Capacity Building), आपातकालीन सेवाएं, रेफरल सेवाएं, एम्बुलेंस, आउटरीच एवं प्रयोगशाला सेवाओं को सुनिश्चित किया गया है। जिला टास्क फोर्स की बैठक में वायु प्रदूषण से होने वाले मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावों की रोकथाम हेतु बहु-विभागीय रणनीति तैयार करने तथा प्रत्येक संबंधित विभाग की स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित करने पर सहमति बनी।
जन-जागरूकता के लिए प्रिंट, ऑडियो-विजुअल, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान एवं बचाव संबंधी संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों जैसे बाजार, कार्यालय, स्कूल, कॉलेज एवं हाईवे के आसपास पोस्टर एवं वॉल पेंटिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिले की समस्त स्वास्थ्य संस्थाओं में ओपीडी एवं दवा वितरण काउंटर के समीप वायु प्रदूषण विषयक आईईसी (सूचना-शिक्षा-संचार) सामग्री का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से किए जाने के निर्देश दिए गए।
विशेष चेस्ट क्लिनिक के माध्यम से कार्डियो-पल्मोनरी रोगों से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। चेस्ट क्लिनिक का संचालन एनसीडी क्लिनिक के साथ समन्वय में किया जाएगा। इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण से संबंधित कार्डियो-पल्मोनरी रोगों की जांच, जोखिम संचार, पहले से पीड़ित रोगियों में संभावित कारणों की पहचान एवं निदान की पुष्टि करना है।
कार्डियो-पल्मोनरी रोगियों को मानक उपचार प्रदान करने पर विशेष जोर
वायु प्रदूषण से संबंधित संभावित एवं निदान किए गए कार्डियो-पल्मोनरी रोगियों में व्यवहार परिवर्तन एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने को प्रोत्साहित किया जाएगा। चेस्ट क्लिनिक की स्थापना शहरी क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, सिविल अस्पतालों, जिला अस्पतालों तथा विशेषज्ञ उपलब्धता की स्थिति में मेडिकल कॉलेजों में की जा सकती है। जिले के समस्त स्वास्थ्य संस्था प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि वे स्वास्थ्य संस्थाओं में आने वाले रोगियों को वायु प्रदूषण से बचाव एवं नियंत्रण के उपायों के प्रति निरंतर जागरूक करें।
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