logo

पहले संगठन को बताया 'विवादों का अड्डा', अब साख बचाने के लिए पत्रकार पर मढ़ा दोष: लॉरेंस एंथोनी का 'इस्तीफा कांड' बेनकाब

'इस्तीफावीर' लॉरेंस एंथोनी की घिनौनी पलटी: पहले संगठन को कोसा, अब पत्रकार को बलि का बकरा बनाकर चाट रहे अपनी जूठन!

*सोनभद्र (ब्यूरो)।* जनपद में 'समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन' के पूर्व जिला सचिव लॉरेंस एंथोनी इन दिनों अपने दोहरे चरित्र और 'पलटू' बयानों को लेकर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। दो दिन पूर्व जिस संगठन को 'विवादों का अड्डा' बताकर और नेतृत्व को 'विफल' घोषित कर उन्होंने इस्तीफा दिया था, आज उसी संगठन में वापस जगह पाने के लिए उन्होंने नैतिकता की सारी हदें पार कर दी हैं। अपनी थूकी हुई बात को चाटते हुए अब लॉरेंस एंथोनी अपनी गलती छिपाने के लिए स्थानीय पत्रकार अमान खान पर 'दबाव' डालने का मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं।

​ *खुद रचा 'इस्तीफा ड्रामा' और खुद ही सोशल मीडिया पर किया वायरल*

​विदित हो कि 20 जनवरी 2026 को लॉरेंस एंथोनी ने अपने लेटरहेड पर स्पष्ट शब्दों में इस्तीफा लिखा था कि उनके पास संगठन के आपसी झगड़ों के लिए 'फालतू समय' नहीं है और वे समाज सेवा के लिए स्वतंत्र होना चाहते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए फोटो खिंचवाकर मीडिया को प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी। लेकिन जैसे ही संगठन के भीतर उनकी स्थिति खराब हुई, उन्होंने गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए नया राग अलापना शुरू कर दिया।

​ *पत्रकार अमान खान को बनाया निशाना, बुनी 'जेल जाने के डर' की झूठी कहानी*

​अब लॉरेंस एंथोनी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पत्रकार अमान खान को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उनका दावा है कि पत्रकार ने उन्हें 'कार्यकर्ताओं के जेल जाने' की बात कहकर डराया और जबरन इस्तीफा लिखवाया। सवाल यह उठता है कि क्या मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले लॉरेंस इतने 'डरपोक' हैं कि किसी की बातों में आकर अपना पद छोड़ दिया? या फिर यह उनकी सोची-समझी साजिश है ताकि वे संगठन की नजरों में फिर से 'बेचारे' बनकर वापसी कर सकें?

​ *'पलटूराम' की पराकाष्ठा: कल तक जो 'नरक' था, आज वही संगठन 'सर्वोपरि'!*

​इस्तीफे के समय लॉरेंस ने संगठन के जिला नेतृत्व पर विफलता का गंभीर आरोप लगाया था। लेकिन आज अचानक उन्हें संगठन की कार्यप्रणाली 'स्वच्छ' लगने लगी है। पत्रकारिता जगत में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए एक निष्पक्ष पत्रकार को मोहरा बनाया जा रहा है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि लॉरेंस एंथोनी के पास अपने आरोपों का कोई सबूत नहीं है और वे केवल 'विक्टिम कार्ड' खेल रहे हैं।

*​जनता की अदालत में विश्वसनीयता 'शून्य', साख बचाने की नाकाम कोशिश*

​सोनभद्र की जनता अब इस 'दोमुंहे' व्यवहार को भली-भांति समझ चुकी है। जो व्यक्ति 48 घंटे के भीतर अपने हस्ताक्षरित पत्र और बयानों से पलट सकता है, उसकी सामाजिक स्वीकार्यता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। जानकारों का कहना है कि लॉरेंस एंथोनी ने अपनी इस 'नौटंकी' से न केवल संगठन की छवि धूमिल की है, बल्कि पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे पर भी कीचड़ उछालने का दुस्साहस किया है, जिसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

*संपादकीय टिप्पणी: "नैतिकता का पतन या अवसरवादिता की पराकाष्ठा?"*

पत्रकारिता समाज का दर्पण होती है, जो सच जैसा है, उसे वैसा ही दिखाने का साहस रखती है। लेकिन जब समाज सेवा का चोला ओढ़े लोग अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं और आपसी कलह की बलि खुद चढ़ने लगते हैं, तो वे अपनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने का सबसे आसान रास्ता चुनते हैं।

लॉरेंस एंथोनी का हालिया प्रकरण इसका जीता-जागता उदाहरण है। कल तक जो संगठन उनकी नजर में 'विवादों का अड्डा' था, आज वे उसी के गुणगान कर रहे हैं। जिस इस्तीफे को उन्होंने खुद लिखकर, दस्तखत कर और मुस्कुराते हुए मीडिया को सौंपा, आज उसे 'दबाव का खेल' बताना उनकी मानसिक दिवालियेपन को दर्शाता है।

एक पत्रकार का काम सूचनाओं को जनता तक पहुँचाना है, न कि किसी के घर में घुसकर जबरन इस्तीफा लिखवाना। पत्रकार अमान खान पर लगाए गए बेबुनियाद आरोप दरअसल उस 'सच' से बचने की छटपटाहट है जो अब लॉरेंस एंथोनी के गले की फांस बन चुका है। ऐसे 'पलटूराम' चरित्र वाले लोग न तो संगठन के सगे हो सकते हैं और न ही समाज के। जनता ऐसे दोमुंहे चेहरों को पहचान चुकी है। अपनी साख बचाने के लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बदनाम करना कायरता की निशानी है।

11
886 views