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महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण की सन्निधि में पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, छोटी खाटू में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

झूंठा -छोटी खाटू (डीडवाना-कुचामण), राजस्थान | 22 जनवरी 2026जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव से पूर्व गुरुवार को छोटी खाटू में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला, जब युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत पहुंचे। दो महान व्यक्तित्वों के इस मिलन से समूचा क्षेत्र श्रद्धा और उत्साह से सराबोर हो गया।

बसंत पंचमी से प्रारंभ होने वाले त्रिदिवसीय मर्यादा महोत्सव हेतु आचार्यश्री महाश्रमणजी अपने विशाल साधु-साध्वी समुदाय के साथ दस दिवसीय प्रवास पर छोटी खाटू पधारे हैं। उनके आगमन से गांव में मेले जैसा दृश्य बन गया है और देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन जारी है।

मर्यादा समवसरण में आचार्यश्री के पधारने के कुछ समय पश्चात आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत ने आचार्यश्री को वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आरएसएस कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया।

अपने मंगल प्रवचन में आचार्यश्री महाश्रमणजी ने कहा कि भारत प्राचीन ग्रंथों और सद्वाणियों की भूमि है। सद्गुरु के सान्निध्य में प्राप्त वाणी जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। उन्होंने अनुशासन और मर्यादा को व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के लिए अनिवार्य बताया तथा कहा कि साधना द्वारा सत्य की प्राप्ति संभव है।

आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि संतों की सन्निधि में आने से जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है। भारत का कार्य दुनिया को मर्यादा और अनुशासन सिखाना है, जिसे वह अपने आचरण से करता आया है। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री की सन्निधि में पहुंचकर “आंखें खुल जाती हैं” और जीवन को सही मार्गदर्शन मिलता है।

कार्यक्रम के उपरांत आचार्यश्री महाश्रमणजी एवं श्री मोहन भागवत के बीच विभिन्न विषयों पर सौहार्दपूर्ण संवाद भी हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर ने छोटी खाटूवासियों के उत्साह को और बढ़ा दिया।

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