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वाराणसी : घर बैठे हाउस टैक्स रिकॉर्ड में बदलाव की सुविधा, नगर निगम की नई उपविधि को मिली मंजूरी


वाराणसी। नगर निगम क्षेत्र के नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। अब हाउस टैक्स रिकॉर्ड में नाम, स्वामित्व और अन्य विवरणों में बदलाव कराने के लिए नगर निगम के दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शासन के निर्देश पर नगर निगम ने म्यूटेशन और टैक्स संबंधी विवरणों में संशोधन को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए नगर निगम (निर्धारण सूची में संशोधन एवं परिवर्तन) उपविधि–2024 का नया ड्राफ्ट तैयार किया है। इस उपविधि को निगम की कार्यकारिणी और सदन से हरी झंडी मिल चुकी है। शासन से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।



नई उपविधि के तहत नामांतरण और टैक्स रिकॉर्ड में सुधार की अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इसके लिए नागरिकों को नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाकर आवेदन करना होगा। आवेदन शुल्क अधिकतम 100 रुपये निर्धारित किया गया है, जिससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने के साथ-साथ पारदर्शी भी होगी।


नगर निगम ने समयबद्ध निस्तारण के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए हैं। निर्विवाद मामलों में ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद 45 कार्य दिवसों के भीतर म्यूटेशन और संशोधन का निस्तारण करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे लंबित मामलों में तेजी आएगी और लोगों को जल्द राहत मिलेगी। नए निर्माण या पुनर्निर्माण की स्थिति में भवन स्वामी को 60 दिनों के भीतर स्व-कर निर्धारण प्रपत्र (फॉर्म-1) भरकर नगर निगम में जमा करना अनिवार्य होगा। वहीं यदि किसी संपत्ति स्वामी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके उत्तराधिकारी को छह माह के भीतर नगर आयुक्त को इसकी सूचना देना जरूरी होगा, ताकि समय पर म्यूटेशन किया जा सके।

नई उपविधि में म्यूटेशन शुल्क को क्षेत्रफल और संपत्ति के मूल्य के आधार पर निर्धारित किया गया है। क्षेत्रफल के अनुसार 1000 वर्ग फुट तक के लिए 1000 रुपये, 1001 से 2000 वर्ग फुट तक 2000 रुपये, 2001 से 3000 वर्ग फुट तक 3000 रुपये और 3000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्रफल होने पर 5000 रुपये शुल्क देना होगा। इसके अलावा 200 रुपये का प्रकाशन शुल्क अलग से देय होगा।

संपत्ति के मूल्य के आधार पर शुल्क में भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। पांच लाख रुपये तक मूल्य वाली संपत्ति पर 1000 रुपये, पांच से दस लाख तक 2000 रुपये, दस से 15 लाख तक 3000 रुपये, 15 से 50 लाख तक 5000 रुपये और 50 लाख से अधिक मूल्य होने पर 10 हजार रुपये शुल्क देना होगा। इसके साथ 200 रुपये का प्रकाशन शुल्क भी अनिवार्य रहेगा।


उपविधि में विलंब करने वालों के लिए जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है। रजिस्ट्री के तीन माह के भीतर आवेदन न करने पर विलंब शुल्क लगेगा। यदि देरी छह माह से अधिक होती है, तो निर्धारित शुल्क का आठ प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना होगा। नगर निगम का कहना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों को घर बैठे सुविधाएं भी मिलेंगी।

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