
अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच ग्रीनलैंड विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा या खरीद की मांग तेज कर दी है, जिससे डेनमार्क और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ तनाव बढ़ गया है। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, अपनी सामरिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों के कारण वैश्विक शक्तियों के केंद्र में है। ट्रंप इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहे हैं, जबकि ईयू इसे संप्रभुता का उल्लंघन मानता है।
ग्रीनलैंड उत्तर अटलांटिक में स्थित है, जो ग्रीनलैंड-आइसलैंड-यूके (जीआईयूके) गैप को नियंत्रित करता है। यह रूस और चीन की पनडुब्बियों की निगरानी, मिसाइल चेतावनी रडार तथा उपग्रह ट्रैकिंग के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, तेल, गैस और दुर्लभ मिट्टी खनिजों के विशाल भंडार इलेक्ट्रिक वाहनों तथा सैन्य उपकरणों के लिए जरूरी हैं।
ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए सैन्य, आर्थिक दबाव बढ़ाया है। पेंटागन ने ग्रीनलैंड की जिम्मेदारी को यूरोपीय कमान से उत्तरी कमान में स्थानांतरित किया। व्हाइट हाउस ने सैन्य विकल्पों को खारिज नहीं किया, जबकि ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी।
ईयू ने इमरजेंसी बैठक बुलाई और एंटी-कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट (एसीआई) सक्रिय करने पर विचार कर रहा है। यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने टैरिफ को संबंधों के लिए हानिकारक बताया। डेनमार्क ने सैन्य टुकड़ियां भेजीं, जबकि फ्रांस, जर्मनी, नॉर्डिक देश एकजुट हो गए।
यह विवाद नाटो गठबंधन को कमजोर कर सकता है, क्योंकि ग्रीनलैंड पर टकराव अटलांटिक सुरक्षा प्रभावित करेगा। ट्रंप ने डावोस में बैठक का ऐलान किया, लेकिन ईयू ने संप्रभुता का सम्मान मांगा। नॉर्डिक देशों ने ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी दबाव का सामना किया है।
ग्रीनलैंड विवाद के प्रमुख कूटनीतिक मोड़ हाल के महीनों में तेज हुए हैं, मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक नीतियों के कारण। यह विवाद डेनमार्क की संप्रभुता, ईयू की एकजुटता तथा नाटो पर दबाव डाल रहा है।
• ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर डेनमार्क को ग्रीनलैंड से हटने की चेतावनी दी तथा डेनिश सेना को "दो डॉगस्लेज" बताया।
• मध्य जनवरी में पेंटागन ने ग्रीनलैंड की जिम्मेदारी को यूरोपीय से उत्तरी कमान में स्थानांतरित किया।
• 17 जनवरी 2026: ट्रंप ने डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड्स तथा फिनलैंड पर 10% टैरिफ (1 फरवरी से 25% तक बढ़ने वाले) लगाने की घोषणा की।
• ईयू ने इमरजेंसी बैठक बुलाई तथा एंटी-कोर्सियन टूल सक्रिय करने पर विचार किया।
• डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति बढ़ाई।
• 20 जनवरी: ट्रंप ने डावोस से पहले नाटो महासचिव मार्क रुट्टे से फोन पर बात की तथा यूरोपीय नेताओं के निजी संदेश साझा किए।
ट्रंप ने डावोस (21 जनवरी 2026) में ग्रीनलैंड पर चर्चा का ऐलान किया, लेकिन ईयू तथा नाटो ने चेतावनी दी कि यह नाटो का अंत हो सकता है। चीन-रूस ने भी ट्रंप को धमकी दी। विवाद व्यापार युद्ध तथा हाइब्रिड वारफेयर में बदल चुका है।
ग्रीनलैंड विवाद के कानूनी पहलू मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून, डेनिश संप्रभुता तथा यूरोपीय संघ के नियमों पर केंद्रित हैं। अमेरिकी दावे को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन माना जा रहा है, जो बल प्रयोग या जबरन क्षेत्र हासिल करने पर रोक लगाता है। ग्रीनलैंड को न तो खरीदा जा सकता है और न ही दबाव से हस्तांतरित, क्योंकि यह टेरा नुलियस नहीं है।
ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का संप्रभुता अधिकार 1814 की कील संधि तथा 1933 के स्थायी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (पीसीआईजे) के फैसले से पुष्ट है। अमेरिका ने खुद इसकी मान्यता दी है, लेकिन ट्रंप ने "मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं" कहकर इसे नकारा। ग्रीनलैंडर्स को स्व-निर्धारण का अधिकार है, जो बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं हो सकता।
डेनमार्क रिग्सफेलिस्कैबेट (किंगडम ऑफ डेनमार्क) के तहत ग्रीनलैंड पर पूर्ण संप्रभुता रखता है, जिसमें विदेश नीति, रक्षा तथा संधियां शामिल हैं। ग्रीनलैंड ईयू का ओवरसीज कंट्री एंड टेरिटरी (ओसीटी) है, जो ईयू संधि के अनुच्छेद 29 तथा 215 के तहत संरक्षित है। क्षेत्रीय हस्तांतरण के लिए डेनमार्क की सहमति अनिवार्य है।
ईयू अनुच्छेद 42(7) टीईयू के तहत पारस्परिक रक्षा क्लॉज सक्रिय कर सकता है। अमेरिकी कदम नॉन-रिकग्निशन नीति तथा संपत्ति जब्ती के दावों को जन्म देगा। रूस ने डेनमार्क के अधिकार को खारिज किया, लेकिन यह ईयू की एकजुटता को मजबूत कर रहा है।
ग्रीनलैंड के निवासी (करीब 57,000) इस विवाद में अपनी स्वतंत्रता और डेनिश संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं। वे अमेरिकी अधिग्रहण को द्वितीय उपनिवेशीकरण मानते हैं तथा इसे स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर चुके हैं। हालिया सर्वेक्षणों से पता चलता है कि 85-94% ग्रीनलैंडर्स अमेरिका में शामिल नहीं होना चाहते।
जनमत सर्वेक्षण
• बर्लिंग्स्के सर्वे (जनवरी 2026): केवल 6% अमेरिका का हिस्सा बनना चाहते हैं, 85% विरोधी तथा 9% अनिर्णीत।
• अन्य पोल: 86% सैन्य अधिग्रहण का विरोध।
• ग्रीनलैंडर्स डेनमार्क से स्वतंत्रता चाहते हैं, लेकिन अमेरिकी नियंत्रण को "अलार्मिंग और अबसर्ड" मानते हैं।
ग्रीनलैंड सरकार ने ट्रंप की मांगों को "नहीं बिकेगा" कहकर खारिज किया। न्यूक तथा कोपनहेगन में हजारों ने "ट्रंप, ग्रीनलैंड से दूर रहो" रैलियां कीं। कार्यकर्ता हेगेलुंड ने कहा, "न डेनमार्क न अमेरिका हमारा भविष्य तय करेंगे।" कुछ युवा आर्थिक लाभ की आशा करते हैं, लेकिन बहुमत डेनिश गुणवत्ता जीवन को पसंद करता है।
ग्रीनलैंडर्स डेनमार्क से बेहतर संबंध तथा पूर्ण स्वतंत्रता चाहते हैं, न कि अमेरिकी प्रचार से प्रभावित होना। ट्रंप के दावे कि "वे हमारे साथ होना चाहते हैं" गलत साबित हो चुके हैं। यह विवाद उनकी एकजुटता बढ़ा रहा है।