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जनपद पंचायत कार्यालय में आरटीआई कानून की उड़ रही धज्जियां


बैकुण्ठपुर। जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर कार्यालय में सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के खुलेआम उल्लंघन का मामला सामने आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जनसूचना अधिकारी को आरटीआई अधिनियम की 24 घंटे के भीतर सूचना देने वाली विशेष धारा और नियमों की भी समुचित जानकारी नहीं है। इससे आम नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
सूत्रों के अनुसार, जनपद पंचायत कार्यालय में समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराने के प्रावधानों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। आरटीआई आवेदन देने के बाद भी आवेदकों को समय पर जानकारी नहीं मिल पा रही, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब सूचना के अधिकार अधिनियम का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाना है।
इतना ही नहीं, जनपद पंचायत अधिकारी पर उच्च अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करने के भी आरोप लग रहे हैं। नवंबर माह में जिला पंचायत अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन ढाई माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई सचिवों ने अब तक नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। आरोप है कि जनपद पंचायत अधिकारी द्वारा अपने चुनिंदा और चाहिता ग्राम पंचायत सचिवों को संरक्षण दिया जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन ग्राम पंचायत सचिवों का स्थानांतरण हो चुका है, उनके द्वारा अब भी 15वें वित्त आयोग की राशि और अन्य मदों से कार्य कराए जा रहे हैं। नियमों के विपरीत इस तरह का कार्य कराया जाना सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार और मनमानी और बढ़ सकती है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारी इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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