
देहरादून: आसन बैराज के किनारे बेशकीमती शीशम पेड़ रहस्यमय ढंग से गायब, चकराता वन प्रभाग की निगरानी पर सवाल
देहरादून जिले के चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत रामपुर मंडी इलाके में आसन बैराज झील के निकट बेशकीमती शीशम सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ों के रहस्यमय ढंग से गायब होने का मामला सामने आया है। स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी और हालिया उपलब्ध तस्वीरों से स्पष्ट है कि यहां पेड़ों को बड़ा होने से पहले ही चरणबद्ध तरीके से काट दिया जा रहा है, जिससे इलाके की हरियाली और जैव विविधता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
पिछले 4 से 5 वर्षों की गहन जांच होने पर बड़ी संख्या में पेड़ों के गायब होने की पुष्टि हो सकती है।
इस अवधि में विभागीय स्तर पर यहां कभी भी कोई आधिकारिक पेड़ कटाई की अनुमति या प्रक्रिया नहीं चली है। फिर भी इलाके में 10 से 15 साल पुराने मजबूत पेड़ लगातार गायब होते जा रहे हैं और अब मुख्य रूप से छोटे-छोटे पेड़ ही दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि शीशम के बेशकीमती पेड़ों को बड़ा होने से पहले ही काट दिया जाता है, जिसकी वजह से बड़े तनों वाले पेड़ यहां नजर नहीं आते।
हालिया तस्वीरें इस प्रक्रिया की पूरी तस्वीर पेश करती हैं। एक तस्वीर में मजबूत शीशम पेड़ की लोपिंग (शाखाओं को बड़े पैमाने पर काटना) साफ नजर आ रही है — यह पेड़ को कमजोर करने का प्रारंभिक चरण है। दूसरी तस्वीर में उसी पेड़ का एक बड़ा हिस्सा पहले ही काट लिया गया दिख रहा है।
तीसरी तस्वीर में मूल रूप से 12-13 फुट ऊंचा पेड़ अब महज 5-6 फुट का रह गया है। सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों में यह बचा हुआ हिस्सा भी पूरी तरह गायब कर दिया जाएगा।
यह तरीका पिछले कई वर्षों से लगातार दोहराया जा रहा है — पहले लोपिंग कर पेड़ को कमजोर करना, फिर हिस्सों में काटकर हटाना, ताकि एक साथ बड़ी कटाई का संकेत न मिले।
यह पूरा क्षेत्र आसन कंजर्वेशन रिजर्व का हिस्सा है, जो चकराता वन प्रभाग के अधीन आता है।
आसन बैराज उत्तराखंड का पहला रामसर साइट घोषित महत्वपूर्ण वेटलैंड है, जहां सर्दियों में हजारों देशी-विदेशी प्रवासी पक्षी आते हैं।
इसकी जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए यह इलाका अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
स्थानीय सूत्रों का मानना है कि अगर इन तस्वीरों जैसी गतिविधियां सामने आ रही हैं, तो पूरे रामपुर मंडी इलाके (चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत) की विस्तृत जांच हो तो अवैध कटाई की वास्तविक स्थिति और पैमाना सामने आ सकता है।
इसके अलावा, अगर आसन बैराज के आसपास के क्षेत्र की पुरानी जीपीएस-आधारित सैटेलाइट तस्वीरें (जैसे गूगल अर्थ या अन्य उपलब्ध इमेजरी) की तुलना वर्तमान तस्वीरों से की जाए तो इलाके की सच्चाई और पेड़ों के गायब होने का पैटर्न स्पष्ट रूप से सामने आ सकता है।
शीशम की लकड़ी अपनी मजबूती, टिकाऊपन और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है, जो इसे बाजार में काफी महंगी और मांग वाली बनाती है। मोटे तनों वाली परिपक्व शीशम लकड़ी मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर निर्माण में काम आती है, जैसे बेड, वार्डरोब, डाइनिंग टेबल, सोफा सेट, कुर्सियां, टीवी यूनिट्स, कैबिनेट्स और बुकशेल्व्स। इसके अलावा, यह दरवाजे, पैनलिंग, पूजा मंदिर और लग्जरी इंटीरियर में भी व्यापक रूप से उपयोग होती है। पतली या कम उम्र वाली लकड़ी अक्सर कार्विंग, हैंडीक्राफ्ट्स, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स, किचन यूटेंसिल्स और छोटे-मोटे सजावटी सामान में इस्तेमाल की जाती है। परिपक्व शीशम की लकड़ी लाखों रुपये कीमत वाली फर्नीचर आइटम्स में बदल जाती है, जबकि कम उम्र वाली लकड़ी अपेक्षाकृत कम मूल्य वाली होती है लेकिन फिर भी बाजार में अच्छी डिमांड रखती है।
बाजार में शीशम लकड़ी की कीमत गुणवत्ता, मोटाई और क्षेत्रीय उपलब्धता पर निर्भर करती है, जहां अच्छी क्वालिटी वाली लकड़ी काफी महंगी बिकती है और अवैध कटाई को बढ़ावा देने का एक प्रमुख कारण बनती है।
चकराता वन प्रभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं कि इतने संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्र में पेड़ों का यह लगातार गायब होना कैसे संभव हो रहा है।
चकराता वन प्रभाग से मांग है कि आसन बैराज के इस संवेदनशील इलाके में तत्काल टीम भेजकर साइट का गहन सर्वेक्षण कराया जाए, पिछले वर्षों के रिकॉर्ड की जांच हो और अवैध कटाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की जाए। जांच में यदि कोई लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदार तत्वों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
यह खबर उपलब्ध तस्वीरों, स्थानीय सूत्रों और तथ्यों पर आधारित है, जिसका एकमात्र उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण में जिम्मेदार कार्रवाई को प्रेरित करना है।