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विशेष रिपोर्ट: रायपुर की बदलती तस्वीर

विशेष रिपोर्ट: रायपुर की बदलती तस्वीर
​सुर्खी: 'स्मार्ट रायपुर' की नई पहचान: खारून रिवर फ्रंट और महादेव घाट का होगा कायाकल्प, पर्यटन को लगेंगे पंख
​रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अब केवल एक प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि पर्यटन और आधुनिक सुविधाओं के संगम के रूप में उभर रही है। राजधानी की जीवनदायिनी मानी जाने वाली खारून नदी के संरक्षण और इसके तटों को साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित करने के प्रोजेक्ट ने अब रफ्तार पकड़ ली है।
​धार्मिक आस्था और आधुनिकता का मिलन ऐतिहासिक महादेव घाट पर हर साल लगने वाले पुन्नी मेले की महत्ता को देखते हुए, शासन द्वारा यहाँ विशेष 'रिवर कॉरिडोर' बनाने की योजना है। इस प्रोजेक्ट के तहत:
​नदी के किनारों पर पक्के घाटों का निर्माण किया जा रहा है।
​पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए किनारों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी।
​सैलानियों के लिए बोटिंग और चौपाटी की सुविधा विकसित की जा रही है।
​प्रदूषण मुक्त करने की चुनौती AIMA मीडिया की टीम ने जब स्थानीय लोगों से बात की, तो उन्होंने खुशी के साथ चिंता भी जताई। शहर के नालों का गंदा पानी सीधे खारून में मिलने से जल प्रदूषित हो रहा है। प्रशासन अब इसके समाधान के लिए STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है ताकि नदी का जल शुद्ध बना रहे।
​रायपुरवासियों को क्या फायदा होगा? 1. पर्यटन: शहर के भीतर ही लोगों को पिकनिक और सुकून के पल बिताने के लिए एक शानदार जगह मिलेगी।
2. रोजगार: रिवर फ्रंट विकसित होने से स्थानीय छोटे दुकानदारों और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
3. प्रॉपर्टी वैल्यू: महादेव घाट और आसपास के इलाकों के विकास से रीयल एस्टेट में भी उछाल आने की उम्मीद है।
​रिपोर्टर की कलम से: रायपुर को 'स्मार्ट सिटी' बनाने का सपना तभी पूरा होगा जब हम विकास के साथ अपनी प्राकृतिक धरोहरों को भी सुरक्षित रखेंगे। खारून की सफाई और सौंदर्यीकरण इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
​रिपोर्टर:इलाही मोहम्मद
AIMA मीडिया जनता की आवाज सच के साथ।

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