
ग्राम पंचायत पतिला में सामुदायिक शौचालय के नाम पर भ्रष्टाचार, कागजों में चल रहा स्वच्छता अभियान
जिला संवाददाता
जय प्रकाश त्रिपाठी
सिद्धार्थनगर
इटवा/सिद्धार्थनगर।
इटवा विकास खण्ड की ग्राम पंचायत पतिला में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत निर्मित सामुदायिक शौचालय में भारी अनियमितता एवं भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। लाखों रुपये की लागत से बनाए गए इस सामुदायिक शौचालय में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिसके चलते यह वर्षों से अनुपयोगी पड़ा हुआ है।
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि शौचालय में न तो सेफ्टी टैंक (सीवर टैंक) का निर्माण कराया गया है और न ही पानी की टंकी अथवा जल आपूर्ति की कोई व्यवस्था की गई है। बिना सेफ्टी टैंक के शौचालय का संचालन कैसे संभव है, यह प्रश्न न केवल ग्रामीणों बल्कि पूरे स्वच्छ भारत मिशन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
इतना ही नहीं, सामुदायिक शौचालय के मुख्य द्वार के ठीक सामने सेफ्टी टैंक के नाम पर एक गड्ढा खोदकर अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे गांव के बच्चों के गिरने की आशंका बनी रहती है। ग्राम प्रधान का लगभग पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्ति की ओर है, लेकिन इस गंभीर खामी को दूर करने की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी की व्यवस्था न होने के कारण शौचालय पूरी तरह ठप पड़ा है और अधिकांश समय उस पर ताला लटका रहता है। इसका सीधा दुष्प्रभाव गांव की महिलाओं और किशोरियों पर पड़ रहा है, जिन्हें आज भी मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सामुदायिक शौचालय निर्माण के दौरान कागजों में सभी सुविधाएं दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। वास्तविकता यह है कि मौके पर न पानी की टंकी मौजूद है और न ही सीवर टैंक, जबकि अभिलेखों में सामुदायिक शौचालय निर्मित दिखाया गया है।
गांववासियों के अनुसार उन्होंने इस संबंध में कई बार ग्राम पंचायत सचिव एवं संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए तथा शौचालय को सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ शीघ्र चालू कराया जाए।
इस संबंध में जानकारी लेने पर जब संवाददाता ने ग्राम पंचायत सचिव से फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि उन्हें हाल ही में चार्ज मिला है, इसलिए यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब संज्ञान लेते हैं और ग्राम पंचायत पतिला की बहन-बेटियों को इस अपमानजनक स्थिति से कब निजात मिलती है, या फिर स्वच्छ भारत मिशन केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।