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शिकायतकर्ता ही बना शिकार! यूनियन बैंक मैहर में घूसखोरी के खिलाफ आवाज उठाने पर छीनी गई रोज़ी, हाईकोर्ट जाएगा मामला

मैहर (सतना)।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मैहर शाखा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग व्यवस्था की पारदर्शिता और व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक में कथित घूसखोरी, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत करने वाले बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) को ही सजा देते हुए उसकी BC ID बंद कर दी गई, जिससे उसकी आजीविका पूरी तरह छिन गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता प्रदीप तिवारी, जो पिछले कई वर्षों से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, शाखा मैहर में बैंक मित्र के रूप में सेवाएं दे रहे थे, ने शाखा स्तर पर कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से की जा रही घूसखोरी और अनियमित बैंकिंग गतिविधियों की लिखित शिकायत की थी। शिकायत के बाद बैंक प्रबंधन हरकत में आया और एक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिकायत निराधार नहीं थी।
इसके बावजूद, 21 अगस्त 2025 को अचानक शिकायतकर्ता की BC ID को “संदिग्ध गतिविधि” का हवाला देकर निष्क्रिय कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि शाखा और क्षेत्रीय स्तर पर जांच के बाद भी शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई ठोस आरोप सिद्ध नहीं हुआ, फिर भी आज तक उसकी ID बहाल नहीं की गई।
बैंक प्रबंधन इस पूरे मामले को “कमर्शियल डिसीजन” बताकर पल्ला झाड़ रहा है, जबकि पीड़ित का कहना है कि यह कार्रवाई प्रतिशोधात्मक है और सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। पीड़ित के अनुसार, उसके पास पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो रिकॉर्डिंग, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वह न्यायालय में प्रस्तुत करेगा।
पीड़ित का कहना है कि BC ID बंद होने से न सिर्फ उसकी रोज़ी-रोटी प्रभावित हुई है, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों ग्राहकों को भी बैंकिंग सेवाओं से वंचित होना पड़ा है। कई बार बैंक और RBI से शिकायत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
अब यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचने की तैयारी में है, जहां बैंक प्रबंधन की कथित मनमानी, भ्रष्टाचार और शिकायतकर्ता को दबाने की कोशिश को चुनौती दी जाएगी। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां भ्रष्टाचार उजागर करने वाले को ही सजा दी जाती है।

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