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साइलेंसर (Modified Silencer) लगाने का चलन अब शहरों से निकलकर गांवों तक पहुंच गया है। ग्रामीण इलाकों में भी अब ऐसे बाइकर्स के खिलाफ अभियान चलाया

साइलेंसर (Modified Silencer) लगाने का चलन अब शहरों से निकलकर गांवों तक पहुंच गया है। पहले यह केवल शहरी युवाओं में "मचो फीलिंग" और "पटाखा" जैसी आवाज के लिए लोकप्रिय था, लेकिन अब यह गाँवों में भी एक फैशन स्टेटमेंट बन गया है, जो शांति भंग करने और ध्वनि प्रदूषण का कारण बन रहा है।
स्थिति की गंभीरता और इसके परिणाम:
गाँवों में बढ़ता चलन: गाँवों में बुलेट में "पटाखा" साइलेंसर लगाकर तेज आवाज में घूमना युवाओं में स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में भी ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) की समस्या बढ़ गई है।
दहशत और परेशानी: इन तेज आवाज वाले साइलेंसर्स से गांव में बुजुर्गों, बच्चों, और मरीजों को काफी परेशानी होती है। यह रात के समय नींद में बाधा डालते हैं।
: पुलिस ने अब इसे गंभीरता से लिया है।
भारी जुर्माना और कार्रवाई: मोटर व्हीकल एक्ट के तहत, मॉडिफाई साइलेंसर लगाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना, बाइक की जब्ती, और यहां तक कि 6 महीने तक की कैद भी हो सकती है।
साइलेंसर नष्ट करना: कई जगहों पर पुलिस ने जब्त किए गए हजारों मॉडिफाइड साइलेंसरों को रोड रोलर से कुचलकर नष्ट किया है, जो बाकी लोगों के लिए एक सख्त संदेश है।
मैकेनिक पर भी कार्रवाई: न केवल वाहन मालिक, बल्कि उन गैराज और दुकानदारों पर भी नजर रखी जा रही है जो अवैध रूप से ऐसे साइलेंसर बेचते या लगाते हैं।

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