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**बिना निर्माण आठ माह पहले मजदूरी भुगतान, फर्जी पंजीयन का पर्दाफाश!


ग्राम पंचायत गगोरी में PM आवास और मनरेगा में बड़े घोटाले के संकेत

सरसींवा (सारंगढ़-बिलाईगढ़)। सरसींवा क्षेत्र के ग्राम पंचायत गगोरी में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) और मनरेगा में करोड़ों की योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में सामने आया है कि मनरेगा के तहत स्वीकृत 90 दिवस की मजदूरी का भुगतान एक हितग्राही को आवास निर्माण शुरू किए बिना ही आठ माह पहले कर दिया गया। यह प्रधानमंत्री आवास योजना की गाइडलाइन का खुला उल्लंघन है, जिसके अनुसार मजदूरी तभी देय होती है जब आवास निर्माण की वास्तविक प्रगति हो और हितग्राही स्वयं श्रमदान करे।
इसके साथ ही फर्जी पंजीयन का मामला भी उजागर हुआ है। आरोप है कि ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक ने एक हितग्राही के नाम से गांव के अन्य व्यक्ति का जॉब कार्ड उपयोग कर हाजिरी चढ़ाई, जिससे सरकारी राशि का गलत तरीके से भुगतान हुआ। इस पूरे प्रकरण में रोजगार सहायक, सरपंच, सचिव और आवास मित्र की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
कागजों में चली फावड़ा, जमीनी हकीकत शून्य
स्थानीय स्रोतों के अनुसार कई आवासों में कागजों पर 40–60% तक निर्माण दर्शाया गया है, जबकि मौके पर निर्माण शुरू तक नहीं हुआ। पंचायत रिकॉर्ड और पोर्टल एंट्री में भारी अंतर मिलने की आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री आवास निरीक्षण अभियान के दौरान कई जिलों में इसी तरह की अनियमितताओं पर आवास मित्र और रोजगार सहायकों को बर्खास्त, तथा सचिवों पर निलंबन व विभागीय जांच की कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में यह मामला भी प्रशासनिक सख्ती की मांग करता है।

रोजगार सहायक का वर्जन
फर्जी पंजीयन और अग्रिम भुगतान के मामले में पूछे जाने पर रोजगार सहायक द्वारिका साहू ने सफाई देते हुए कहा—
“जॉब कार्ड पंजीयन में मेरी कोई गलती नहीं। इसे जनपद स्तर के अधिकारियों ने किया है। मजदूरी भुगतान भी ऊपर के अधिकारियों के निर्देश पर किया गया है।

उनके इस बयान से मामले में उच्च स्तर तक मिलीभगत या आदेश-श्रृंखला में अनियमितता की संभावना और मजबूत होती है।
क्या होगी कार्रवाई? प्रशासन की परीक्षा
ग्राम पंचायत गगोरी का मामला सिर्फ तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि योजनाबद्ध अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। अब ग्रामीणों और पंचायत क्षेत्र के लोगों में यह चर्चा है कि—
क्या प्रशासन इस मामले में भी वही सख्ती दिखाएगा, जैसा अन्य जिलों में दिखाया गया है?
या फिर दोषियों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण देकर प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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