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प्रशासनिक कार्रवाई: मजार विवाद में छह अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज


देवरिया जिले में सरकारी भूमि से जुड़े एक पुराने विवाद में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। वर्ष 1993 से विवादित बंजर भूमि को कथित रूप से मजार के नाम पर दर्ज कराने के मामले में छह सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए सरकारी अभिलेखों में भूमि की प्रकृति बदल दी और उसे धार्मिक स्थल के रूप में दर्ज करा दिया।

प्रशासनिक जांच में यह सामने आया कि संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से बंजर दर्ज थी, बावजूद इसके इसे मजार के रूप में दिखाया गया। इस प्रक्रिया में न तो वैधानिक अनुमति ली गई और न ही निर्धारित नियमों का पालन किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने इसे सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और कर्तव्य में लापरवाही का गंभीर मामला माना।

विवाद सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने अवैध कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई भी की थी। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई किसी धर्म या आस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि अवैध कब्जे और नियमविरुद्ध दर्जीकरण के खिलाफ की गई है।

अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को प्रशासनिक स्तर पर एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह कितने ही पुराने रिकॉर्ड से संबंधित क्यों न हो।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस कार्रवाई से सरकारी भूमि की सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगेगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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