
साधना और सिद्धि का रहस्यमय पर्व है-गुप्त नवरात्रि- डॉ. शिवानंद
अहमदाबाद के डॉ. शिवानंद शास्त्री के अनुसार गुप्त नवरात्र साधना और सिद्धि का एक रहस्यमय पर्व है जो साल में दो बार (माघ और आषाढ़ माह में) आता है, जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों और दस महाविद्याओं (जैसे काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी) की गुप्त रूप से पूजा की जाती है, जिससे आध्यात्मिक शक्ति, धन, यश और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, खासकर तंत्र-मंत्र सिद्ध करने और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व शक्ति के गुप्त, आंतरिक जागरण और आध्यात्मिक उन्नति पर केंद्रित होता है, जिसमें दिखावा वर्जित है और गोपनीयता आवश्यक है।
गुप्त नवरात्रि का महत्व:
दस महाविद्या की पूजा: इस दौरान माँ दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की विशेष पूजा होती है, जिससे साधकों को असाधारण शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
साधना और सिद्धि: यह पर्व तंत्र-मंत्र, योग और ध्यान के माध्यम से सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
आंतरिक शक्ति का जागरण: गुप्त नवरात्रि आंतरिक शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्म-ज्ञान को जगाने का अवसर देती है।
मनोकामना पूर्ति: श्रद्धा और नियम से की गई साधना से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता मिलती है।
पूजा विधि और नियम (सामान्य):
गुप्तता: पूजा गुप्त रूप से, एकांत में और बिना दिखावे के की जाती है।
कलश स्थापना: घटस्थापना के साथ नवरात्रि का प्रारंभ होता है।
मंत्र जाप: महाविद्याओं के बीज मंत्रों का जाप 108 या 1008 बार किया जाता है।
शुद्धि: मानसिक और शारीरिक शुद्धि, तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से परहेज आवश्यक है।
कब आती है?
यह माघ और आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। संक्षेप में, गुप्त नवरात्रि माँ दुर्गा की गहन साधना, आध्यात्मिक उन्नति और छिपी हुई शक्तियों को जागृत करने का एक अत्यंत शक्तिशाली और गोपनीय पर्व है।