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मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की जीवंत चेतना थे l

मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की जीवंत चेतना थे। उन्होंने देश के संविधान के निर्माण से लेकर आदिवासी समाज के हक़, सम्मान और सहभागिता की लड़ाई को दृढ़ता व दूरदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया। झारखंड की आत्मा उनके विचारों, संघर्ष और सपनों में बसती थी।

उनके नाम पर हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई अंतर्राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के माध्यम से अब तक 100 से अधिक झारखंडी युवा विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे/चुके हैं। यह उनके विचारों को आगे बढ़ाने की एक सशक्त पहल है।

मेरे यूनाइटेड किंगडम दौरे का एक अहम उद्देश्य भी मरांग गोमके के जीवन और आदर्शों को श्रद्धांजलि देते हुए इस छात्रवृत्ति को और अधिक सुदृढ़, व्यापक और प्रभावी बनाना है।

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