
सीएम पोर्टल उत्तराखंड: शिकायत निवारण या शिकायतकर्ता को कटघरे में खड़ा करने की व्यवस्था?
देहरादून।
उत्तराखंड सरकार द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से शुरू किया गया मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं सीएम पोर्टल आज स्वयं सवालों के घेरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस तंत्र को जनता की आवाज़ को शासन तक पहुँचाने का माध्यम माना गया था, वही तंत्र कई मामलों में शिकायतकर्ता के लिए मानसिक, प्रशासनिक और सामाजिक परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है।
सीएम पोर्टल पर दर्ज की गई शिकायतों को लेकर अनेक शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समस्या का समाधान होने के बजाय उन्हें बार-बार विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं। स्थिति यह है कि कई बार संबंधित अधिकारी स्वयं यह तय नहीं कर पाते कि शिकायत किस विभाग से संबंधित है। परिणामस्वरूप शिकायतें एक विभाग से दूसरे विभाग में स्थानांतरित होती रहती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती।
कई मामलों में यह भी सामने आया है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद शिकायतकर्ता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। संबंधित विभागों द्वारा स्पष्टीकरण, फोन कॉल या व्यक्तिगत रूप से बुलाकर ऐसे सवाल किए जाते हैं, जिनसे शिकायतकर्ता खुद को दोषी या दबाव में महसूस करता है। इससे आम नागरिकों में यह संदेश जाता है कि शिकायत करना ही अपने आप में जोखिम भरा कदम है।
सीएम पोर्टल की सबसे बड़ी कमजोरी विभागीय समन्वय की कमी मानी जा रही है। शिकायतें स्वतः संबंधित विभाग को भेजे जाने का दावा किया जाता है, लेकिन व्यवहारिक स्थिति यह है कि अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि मामला उनके विभाग का नहीं है। इससे शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है।
सरकार द्वारा शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। कई शिकायतें महीनों तक लंबित रहती हैं और अंततः “समाधान कर दिया गया” लिखकर बंद कर दी जाती हैं, जबकि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत नहीं मिलती।
सीएम पोर्टल जैसे महत्वपूर्ण तंत्र पर जनता का भरोसा कमजोर होना चिंता का विषय है। यदि शिकायतकर्ता को ही प्रताड़ना, भ्रम और दबाव का सामना करना पड़े, तो आम नागरिक भविष्य में शिकायत दर्ज कराने से कतराने लगेंगे। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही की अवधारणा को गहरा आघात पहुँचता है।
विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि सीएम पोर्टल को प्रभावी बनाने के लिए शिकायतों का स्पष्ट विभागीय वर्गीकरण, अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण और शिकायतकर्ता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। जब तक शिकायतकर्ता को सम्मान और भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी शिकायत निवारण तंत्र अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सकता।
स्पष्ट है कि सीएम पोर्टल को केवल एक औपचारिक व्यवस्था न बनाकर, वास्तविक जनसमस्या समाधान का माध्यम बनाना समय की आवश्यकता है।