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हरिनारायण दीक्षित के उपन्यास "हैल्पर" का हुआ विमोचन



मेरठ। अखिल भारतीय भ्रूण-संरक्षण संस्थान एव पंवार वाणी फाउण्डेशन के संयुकत तत्वावधान तथा कलमपुत्र काव्यकला मंच के संयोजन में दिनांक 18 जनवरी सन् 2026 को प्यारेलाल शर्मा स्मारक, मेरठ के छोटे हॉल में कवि एवं साहित्यकार पंडित हरि नारायण दीक्षित ‘हरि’ के उपन्यास ‘हैल्पर’ का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। मुख्य अतिथिं श्री अभिमन्यू खन्ना (खन्ना इम्पलेर्स) रहे। साहित्यकार पं. हरिनारायण दीक्षित की धर्मपत्नी स्व. श्रीमती शकुन्तला दीक्षित जी की प्रथम पुण्य स्मृति को समर्पित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य श्री सत्यव्रत शर्मा द्वारा की गई। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री महेश शर्मा जी (रा0अध्यक्ष आ.इ.मीडिया एसो.) श्री प्रवीण भड़ाना जी (समाजसेवी) उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन श्री अभिमन्यु खन्ना ने किया। संचालन साहित्यकार एवं इतिहासकार चरण सिंह स्वामी ने किया। उपन्यास को ‘स्वामी चरणदेव पब्लिकेशन’ द्वारा प्रकाशित किया गया।
उपन्यास की समीक्षा दो उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत श्री संजय के, शहीद आशीष की वीरांगना श्रीमती शिवि स्वामी एवं कहानीकार अशोक कुमार गौड ने की।
रणविजय सिंह ‘पुलूर’ ने समीक्षा करते हुए कहा कि प्रस्तुत लघु उपन्यास में वर्तमान की प्रमुख समस्यायें जैसे बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, शोषण, अन्याय, अभाव, राष्ट्रभाषा हिन्दी की उपेक्षा और गिरते नैतिक मूल्यों को चित्रित किया गया है। संयज के. ने कहा कि यह उपन्यास पवित्र प्रेम की तथा आदर्शाें की स्थापना का भी प्रयास आदर्श सेवक, आदर्श मालिक, आदर्श पत्नी, आदर्श पति और आदर्श पुत्री व आदर्श पिता के रूप में करता है। शिवि स्वामी ने कहा कि यह उपन्यास मजूदरों एवं मालिकों के सम्बन्धें को आदर्श स्थिति में प्रस्तुत करता है तथा मजदूरों की संवेदनाओं को व्यक्त करता है। इसे पढ़कर सभी प्रकार के मजदूरों के विषय में मालिकों की अच्छी सोच बनेगी। कहानीकार अशोक कुमार गौड ने कहा- लघु उपन्यास ‘हैल्पर’ भरपूर मनोरंजन करते हुए सभी को मेहनत, ईमानदारी एवं संघर्ष करने की प्रेरणा देने के साथ ही उद्योग जगत की विसंगतियों को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगा।
उपन्यास के लेखक पं. हरिनारायण दीक्षित ‘हरि’ बताया कि हिन्दी की दयनीय दशा और जन सामान्य की मनः स्थिति को भी इसमें दर्शाया है। ‘हैल्पर’ शब्द उस पीड़ा का प्रतीक है, जो एक हिन्दीप्रिय (हिन्दी से परास्नातक) व्यक्ति को अपने हिन्दी के उपन्यास में शीर्षक के रूप में प्रयुक्त करना पड़ा। लेकिन सच्चाई, ईमानदारी, कर्त्तव्यनिष्ठा एवं संस्कारों की जननी संस्कृत की बेटी हिन्दी अन्ततः अपना प्रभाव दिखाती है और इसका नायक अन्त में सफल एवं सम्मानित जीवन जीने की मंज़िल पर पहूँच जाता है।
कार्यक्रम व्यवस्थापक के रूप में गज़लकार मंगल सिंह ‘मंगल’ एवं प्रशान्त दीक्षित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके अतिरक्ति जिन विशिष्टजनों का सान्निध्य प्राप्त हुआ, उनमें कवि सर्वश्री सत्यपाल ‘सत्यम’, सुमनेश सुमन, पंडित ईश्वर चंद्र गंभीर, राजेश्वर घायल, संगीत शर्मा, ध्रुव कुमार श्रीवास्तव, सुदेश ‘दिव्य, चन्द्र शेखर मयूर, राजकुमार शिशोदिया, सुरेन्द्र खेड़ा, रीना खेड़ा, राजीव शर्मा, त्रिनाथ मिश्रा उपस्थित रहे। समाजसेवियों में सर्वश्री दिवान गिरि गोस्वामी ; प्रवीण सिरोही, सागर चौधरी, विजेन्द्र, डॉ. दिनेश वत्स, ओमप्रकाश पाण्डेय, ऋषिराज शर्मा, दुर्गेश भारद्वाज उपस्थित रहे। इस अवसर कुछ कवियों ने काव्यपाठ भी किया।

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