मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा केवल एक महान व्यक्तित्व नहीं थे, वे आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और संवैधानिक अधिकारों की जीवंत चेतना थे l
मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा केवल एक महान व्यक्तित्व नहीं थे, वे आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और संवैधानिक अधिकारों की जीवंत चेतना थे। संविधान निर्माण से लेकर आदिवासी समाज के सम्मान, सहभागिता और भविष्य की लड़ाई तक, उनका योगदान दूरदृष्टि, साहस और विचारशील नेतृत्व का प्रतीक रहा।
उनके नाम पर अबुआ सरकार द्वारा प्रारंभ की गई अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति आज उनके विचारों को आगे बढ़ा रही है। इस पहल के माध्यम से अब तक 100 से अधिक झारखण्डी युवा विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
@HemantSorenJMM